कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भरण-पोषण किसी ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हो या खुद खर्च नहीं उठा पा रहा हो.
कोर्ट ने कहा - कोई पुरुष कानूनी तकनीकी खामियों का लाभ उठाकर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता।
उच्च न्यायालय ने कहा कि केवल शिक्षा के आधार पर अभिभावक तय नहीं होता। बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए पिता की अपील खारिज कर अभिर...
Bombay High Court का बड़ा फैसला, पति पर FIR जारी रखने के आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट : पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता का नाम जरूरी नहीं
जब तक शादी नहीं, तब तक लड़का-लड़की अजनबी. किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए

