इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता से शादी

blog-img

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता से शादी
करने पर बलात्कार का आरोप किया रद्द

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। अदालत ने यह निर्णय तब लिया जब यह तथ्य सामने आया कि आरोपी और पीड़िता ने न केवल विवाह कर लिया है, बल्कि वे काफी समय से एक सुखी दांपत्य जीवन भी बिता रहे हैं। 

न्यायमूर्ति ने कही बड़ी बात 

यह फैसला न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने सुनाया। मामला संत कबीर नगर की एक निचली अदालत में लंबित था, जिसे रद्द करने के लिए मुख्य आरोपी और दो अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में मुकदमे को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। 

अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, "मौजूदा मामले में मुख्य याचिकाकर्ता (आरोपी) और पीड़िता ने विधिवत विवाह कर लिया है। इस शादी से उनका एक बच्चा भी है और वे पिछले कई वर्षों से एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी रहे हैं। यहां तक कि शिकायतकर्ता (लड़की के पिता) ने भी अदालत के मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में समझौता कर लिया है।" 

कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द नहीं किया गया, तो यह पति-पत्नी और उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक 'कानूनी आघात' (Legal Injury) जैसा होगा। 

'अपराध का दाग धुल गया' 

न्यायमूर्ति सिंह ने मामले की गंभीरता और बाद में हुए घटनाक्रमों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण अवलोकन किया। उन्होंने कहा, "बाद में हुए विकास (शादी और बच्चे) को देखते हुए, आवेदकों द्वारा किया गया अपराध, यदि कोई था भी, तो अब वह धुल चुका है। ऐसे में आवेदकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।" 

क्या था पूरा मामला? 

घटनाक्रम जनवरी 2017 का है, जब संत कबीर नगर के बखिरा पुलिस स्टेशन में लड़की के पिता ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि मुख्य आरोपी उनकी नाबालिग बेटी को भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। हालांकि, कहानी में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी, क्योंकि वह उस समय बालिग (Major) थी। मुकदमे के दौरान ही, आरोपी और पीड़िता ने विवाह कर लिया और साथ रहने लगे। इस रिश्ते से अगस्त 2018 में उन्होंने एक बेटे का स्वागत किया। परिवार की खुशहाली और आपसी समझौते को प्राथमिकता देते हुए हाईकोर्ट ने अब पुरानी एफआईआर और उससे जुड़ी कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



हिप्र मंडी कोर्ट : दूसरी पत्नी को भी मिलेगा पहली जैसा अधिकार
अदालती फैसले

हिप्र मंडी कोर्ट : दूसरी पत्नी को भी मिलेगा पहली जैसा अधिकार

कोर्ट का बड़ा फैसला; पति के लापता होने पर किया था दूसरा विवाह गुजारा भत्ता देना ही होगा

महिला की गरिमा और आश्रय अधिकार पर मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालती फैसले

महिला की गरिमा और आश्रय अधिकार पर मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों को पीड़ित महिला को उचित मुआवजा देना होगा और उसके घर का तत्काल पुनर्निर्माण भी करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट : जैसे ही तलाक की कार्यवाही
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : जैसे ही तलाक की कार्यवाही , शुरू होती है, हर कोई बेरोजगार बन जाता है

इस मामले में पत्नी ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान पति ने कहा कि उसे तलाक नहीं चाहिए।

पटना हाई कोर्ट : आपसी सहमति से
अदालती फैसले

पटना हाई कोर्ट : आपसी सहमति से , तलाक के लिए 1 वर्ष अलग रहना जरूरी

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 'अलग रहना' का अर्थ केवल भौतिक दूरी नहीं, बल्कि वैवाहिक संबंधों का पूर्णतः समाप्त होना है। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट : पति के खिलाफ केस दर्ज  कराना
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाई कोर्ट : पति के खिलाफ केस दर्ज कराना , आत्महत्या के लिए उकसाने का कारण नहीं

कोर्ट ने पत्नी और परिवार के खिलाफ कार्यवाही रद की, ‘दुराशय’ का कोई प्रमाण नहीं