दिल्ली हाइकोर्ट : पहली पत्नी के रहते हुआ विवाह शून्य,

blog-img

 दिल्ली हाइकोर्ट : पहली पत्नी के रहते हुआ विवाह शून्य,
दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पुरुष का दूसरा विवाह उसकी पहली शादी के रहते हुआ है तो वह विवाह कानूनन शून्य माना जाएगा। ऐसी दूसरी पत्नी को सेना पेंशन नियमावली 1961 के तहत फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा, भले ही बाद में पहली पत्नी का निधन हो जाए। 

वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 11 के अनुसार, यदि विवाह के समय पति या पत्नी में से किसी की पूर्व वैध शादी विद्यमान है तो दूसरा विवाह शून्य है। 

यह निर्णय विद्या देवी द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने सशस्त्र बल अधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दिवंगत सिपाही उदय सिंह की विधवा के रूप में उनकी फैमिली पेंशन की मांग खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि उदय सिंह की पहली पत्नी का वर्ष 2012 में निधन हो गया। इसलिए फैमिली पेंशन का अधिकार उन्हें मिलना चाहिए। 
हाइकोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि जो विवाह प्रारंभ से ही शून्य था उसे पहली पत्नी की मृत्यु के बाद वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा, "फैमिली पेंशन का अधिकार उसी पत्नी को है जिसका विवाह अधिकारी से विधि सम्मत हुआ हो।" अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उदय सिंह ने अपने जीवनकाल में पहली शादी को समाप्त करने के लिए कोई कानूनी कदम नहीं उठाया था भले ही वे उससे अलग रह रहे हों। इसलिए दूसरी शादी कानून की नजर में वैध नहीं थी। 

खंडपीठ ने कहा, "उदय सिंह का याचिकाकर्ता के साथ किया गया दूसरा विवाह उनके 2011 में निधन तक अवैध ही रहा। वर्ष 2012 में पहली पत्नी सतवती देवी की मृत्यु से यह विवाह वैध नहीं हो जाता।" याचिकाकर्ता ने केंद्रीय सिविल सेवा पेंशन नियम, 2021 के तहत जारी कार्यालय ज्ञापन का भी हवाला दिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान उनके एडवोकेट ने स्वीकार किया कि यह मामला सेना पेंशन नियमावली के अधीन आता है, इसलिए उक्त नियम लागू नहीं होते। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित ज्ञापन में भी ऐसे जीवनसाथी को अधिकार नहीं दिया गया, जिसका विवाह अधिकारी की मृत्यु के समय विधिसम्मत न हो। 

हाइकोर्ट ने माना कि अधिकरण ने याचिकाकर्ता के दावे को सही ढंग से खारिज किया। याचिका में कोई दम न पाते हुए अदालत ने उसे खारिज किया।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट से महिला वकीलों को बड़ी
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट से महिला वकीलों को बड़ी , राहत: SCAORA चुनाव में पद आरक्षित

इस फैसले से यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नेतृत्व में जगह मिलेग...

दिल्ली हाईकोर्ट : मां ज्यादा कमाती है
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : मां ज्यादा कमाती है , फिर भी बच्चे का पूरा खर्च पिता ही उठाएगा

अदालत ने एक तलाकशुदा व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने बच्चों के परवरिश का खर्च बराबर बांटने की मांग की थी।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट : पति छात्र हो या बेरोजगार,
अदालती फैसले

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट : पति छात्र हो या बेरोजगार, , पत्नी को गुजारा भत्ता देना अनिवार्य

कोर्ट ने कहा - एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजगार प्राप्त करना संभव है और उसे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट : आपसी सहमति से तलाक
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : आपसी सहमति से तलाक , के समझौते से पीछे हटना आसान नहीं

पीठ ने कहा कि कानून भले ही तलाक के अंतिम आदेश से पहले सहमति वापस लेने की अनुमति देता है, लेकिन इस प्रावधान का इस्तेमाल स...

मप्र हाईकोर्ट : शादी की ज़िम्मेदारियों के लिए
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : शादी की ज़िम्मेदारियों के लिए , नौकरी छोड़ने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार

हाईकोर्ट का अहम फ़ैसला -इंजीनियर पत्नी को ₹40 हज़ार भरण-पोषण देने का फ़ैसला बरकरार रखा