पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि धारा 13(बी) हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आपसी सहमति से तलाक पाने के लिए पति-पत्नी का कम-से-कम एक वर्ष तक अलग रहना अनिवार्य शर्त है। इस शर्त के अभाव में तलाक की डिक्री नहीं दी जा सकती।
न्यायाधीश नानी तागिया एवं न्यायाधीश आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने कुमारी वागीशा बनाम कुमार संगम मामले में यह निर्णय सुनाते हुए परिवार न्यायालय, शिवहर के आदेश को सही ठहराया और अपील खारिज कर दी।
फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
पति ने स्वयं स्वीकार किया कि 15 मार्च 2023 को वैवाहिक संबंध स्थापित हुए, जबकि तलाक की याचिका 11 मई 2023 को ही दाखिल कर दी गई। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 'अलग रहना' का अर्थ केवल भौतिक दूरी नहीं, बल्कि वैवाहिक संबंधों का पूर्णतः समाप्त होना है। मामले के अनुसार, दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक के लिए संयुक्त याचिका दायर की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि वे एक वर्ष से अलग नहीं रह रहे थे।



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