शिमला। Himachal Pradesh High Court ने बच्चों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तलाक के समय माता-पिता के बीच हुआ कोई भी आपसी समझौता नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) के अधिकार को न तो सीमित कर सकता है और न ही समाप्त।
न्यायाधीश Vivek Singh Thakur और Ranjan Sharma की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के बीच हुआ समझौता बच्चे की स्वतंत्र सहमति से नहीं होता, इसलिए उससे बच्चे के कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं हो सकते।
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अदालत ने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं और बच्चे की जरूरतें भी बढ़ती हैं। ऐसे में गुजारा भत्ते में पुनर्विचार और वृद्धि पूरी तरह उचित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में तय की गई 1,500 रुपये की राशि वर्तमान समय में महंगाई और आवश्यक खर्चों के मुकाबले बेहद कम है, इसलिए बच्ची 2,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता पाने की हकदार है।
कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही और न्यायसंगत ठहराते हुए पिता तिलक राज की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने पहले आपसी सहमति से तलाक के दौरान तय राशि को बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कहा कि पिता अपनी बेटी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।



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