नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेटा पैदा करने की गहरी जड़ें जमाए सामाजिक सोच के कारण पर्दे के पीछे लिंग चयन (Sex Selection) जैसी प्रथाएं अब भी जारी हैं। इसलिए लिंग जांच विरोधी कानून का सख्ती से पालन और प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। कोर्ट ने एक डॉक्टर की अपील खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लड़ाई में ढिलाई नहीं
जस्टिस Sanjay Karol और Prashant Kumar Mishra की बेंच ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ चल रही लड़ाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई की गुंजाइश नहीं है। अदालत ने कहा कि 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' और जननी सुरक्षा योजना जैसी सरकारी पहलें इस बात का संकेत हैं कि लड़कियों के प्रति होने वाले सिस्टमेटिक भेदभाव को खत्म करने के प्रयास अभी भी जरूरी हैं।
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सोनोग्राफी सेंटर से जुड़ा मामला
मामला महाराष्ट्र के डॉक्टर रमेश से जुड़ा है, जिनके सोनोग्राफी सेंटर में अनिवार्य फॉर्म-एफ रिकॉर्ड में कमियां और कानून के उल्लंघन पाए गए थे। इसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने लिंग जांच विरोधी कानून के तहत कार्रवाई शुरू की।
डॉक्टर ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए पहले रिविजनल कोर्ट और फिर हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया।



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