अगरतला। त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी पुत्री का तलाक उसके पिता की मृत्यु के बाद हुआ है, तो वह त्रिपुरा राज्य सिविल सेवा (संथोचित पेंशन) नियम, 2017 के तहत पारिवारिक पेंशन पाने की पात्र नहीं होगी।
न्यायमूर्ति एस दत्ता पुरकायस्थ ने उज्ज्वला रानी बनाम अगरतला नगर निगम मामले में कहा कि पेंशन नियमों के अनुसार पात्रता तय करने के लिए पेंशनभोगी की मृत्यु के समय दावेदार की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
अगरतला निवासी पॉल ने पिछले वर्ष अपने पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके पिता अगरतला नगर निगम में मजदूर के पद पर कार्यरत थे और एक अक्टूबर 2004 को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त कर रहे थे। उनकी द्वितीय पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनका विवाह हुआ था, लेकिन पति ने उन्हें परित्याग कर दिया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वे पिछले 40 वर्षों से अपने पिता पर आश्रित थीं।
अगरतला पारिवारिक न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद अक्टूबर 2001 में औपचारिक रूप से तलाक की डिक्री जारी की। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 23 फरवरी 2020 को पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया।
अगरतला नगर निगम ने उनका आवेदन खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि तलाकशुदा पुत्रियों को पेंशन लाभ देने संबंधी संबंधित सरकारी अधिसूचना निगम ने अपनाई नहीं है। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में न्यायिक पुनर्विचार की मांग की।



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