भोपाल में अब सूखे पत्तों को जलाने के बजाय उन्हें उपयोगी संसाधन में बदलने की पहल शुरू की गई है। स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप द्वारा ‘गोल्डन लीफ कम्पोस्ट’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत शहर के अलग-अलग इलाकों में सूखी पत्तियों से जैविक खाद तैयार की जा रही है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की सोच बदलना है, ताकि पत्तियों को कचरा मानकर फेंकने या जलाने के बजाय उनका सही उपयोग किया जा सके। इसके लिए कॉलोनियों, स्कूलों, पार्कों और अन्य संस्थानों में लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
ग्रुप की सदस्य रुचिका सचदेवा के अनुसार, शहर में हर साल बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियां जमा हो जाती हैं, जिन्हें अक्सर जला दिया जाता है। लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यही पत्तियां ‘गोल्डन लीफ’ बनकर बेहतरीन जैविक खाद में बदल सकती हैं।
अभियान के तहत भोपाल में करीब 100 स्थानों पर लीफ कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इन यूनिट्स को ऐसे स्थानों पर स्थापित किया जाएगा जहां पेड़ों की संख्या अधिक है और पतझड़ के दौरान बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं। प्रत्येक यूनिट से लगभग 100 किलो जैविक खाद तैयार होने की उम्मीद है, जिससे कुल मिलाकर करीब 10 टन खाद बनाई जाएगी।
लीफ कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया काफी सरल है। जालीदार संरचना में सूखी पत्तियों को इकट्ठा किया जाता है और उनमें नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है। लगभग तीन से चार महीने में ये पत्तियां सड़कर उपयोगी खाद में बदल जाती हैं, जिसका उपयोग बागवानी और पौधारोपण में किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पत्तियों को जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होता है। इससे जहरीला धुआं निकलता है और कई उपयोगी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत, कम्पोस्टिंग से न केवल प्रदूषण कम होता है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
स्वच्छता किटी ग्रुप, जिसमें करीब 95 सदस्य शामिल हैं, हर महीने योगदान देकर शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान चलाता है। यह समूह पार्कों की सफाई, तालाबों के आसपास कचरा हटाने और लोगों को कचरे को संसाधन में बदलने के लिए जागरूक करने का काम भी कर रहा है।
सन्दर्भ स्रोत एवं छाया : ईटीवी भारत



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