बुरहानपुर में एक दिव्यांग युवती ने अपने मजबूत हौसलों से यह साबित कर दिया कि अगर इरादे पक्के हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। शिक्षित युवती कंचन गुरवे ने अपने दोस्त और अतिथि शिक्षक कपिल मिश्रा के साथ मिलकर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के पुस्तक प्रेमियों के लिए एक अनोखी पहल की शुरुआत की है।
दोनों ने मिलकर “बुकीज क्लब” नाम से एक ओपन लाइब्रेरी की स्थापना की है, जिसे नगर निगम के सहयोग से शुरू किया गया। इस लाइब्रेरी में 500 से अधिक किताबें उपलब्ध हैं, जिनमें यूपीएससी, एमपी पीएससी, आईआईटी, जेईई, विज्ञान, मोटिवेशनल और आध्यात्मिक विषयों की किताबें शामिल हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि इसे न केवल स्थानीय स्तर पर सराहा गया, बल्कि देश के पांच राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र सहित अन्य जगहों पर भी लोगों ने इस मॉडल को अपनाकर ओपन लाइब्रेरी शुरू की है।
कंचन गुरवे ने अपनी शारीरिक कमजोरी को अपनी ताकत बनाया और समाज को शिक्षा से जोड़ने का माध्यम चुना। उन्होंने बताया कि इस लाइब्रेरी का उद्देश्य लोगों को किताबों के महत्व से परिचित कराना और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है।
लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। हालांकि, जो पाठक किताबें घर ले जाना चाहते हैं, उनसे सुरक्षा के तौर पर 100 रुपये लिए जाते हैं। अब तक 150 से अधिक स्थायी सदस्य और 300 से अधिक अस्थायी सदस्य इस पहल से जुड़ चुके हैं।
कपिल मिश्रा ने बताया कि किताबें इंसान की सच्ची साथी होती हैं और पढ़ाई के साथ-साथ ज्ञान और सोच को भी विकसित करती हैं। इसी उद्देश्य से इस लाइब्रेरी में बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक के लिए हर प्रकार की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं।
सन्दर्भ स्रोत एवं छाया : ईटीवी भारत



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