पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट : मां के पास बच्ची रहना गैरकानूनी नहीं

blog-img

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट : मां के पास बच्ची रहना गैरकानूनी नहीं

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि अगर बच्ची अपनी मां के साथ रह रही है, तो इसे गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने 6 महीने की बच्ची की कस्टडी लेने के लिए पिता द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस रूपिंदरजीत चाहल ने कहा कि मां ही बच्चे की असली अभिभावक होती है। जब तक कोर्ट कोई अलग आदेश नहीं देता, तब तक बच्चा मां के पास रहना बिल्कुल सही है और इसे गलत नहीं माना जाएगा। 

ये सही तरीका नहीं - हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ लोग बच्चे को अपने पास लाने के लिए “हैबियस कॉर्पस” याचिका लगा देते हैं, लेकिन यह सही तरीका नहीं है। यह याचिका सिर्फ तब लगती है, जब किसी को गलत तरीके से रोका गया हो। बच्चे की कस्टडी तय करने का अलग तरीका होता है। इसमें देखा जाता है कि बच्चे के लिए क्या सबसे अच्छा है, उसकी देखभाल, सुरक्षा और भविष्य।

पंचकूला के रहने वाले पिता ने हाईकोर्ट में कहा था कि उसकी पत्नी बच्ची को लेकर मायके चली गई और वापस नहीं आई। उसने यह भी आरोप लगाया कि मां, बच्ची की ठीक से देखभाल नहीं कर रही और समय पर टीकाकरण भी नहीं कराया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को कस्टडी देने के लिए पर्याप्त नहीं माना।

बच्चा मां के पास तो गैरकानूनी नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि, अगर बच्चा मां के पास है, तो यह गैरकानूनी नहीं माना जाएगा। कस्टडी पाने के लिए सही तरह का केस करना जरूरी है, “हैबियस कॉर्पस” याचिका से यह मामला नहीं सुलझेगा। ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा महत्व इस बात का होता है कि बच्चे के लिए क्या बेहतर है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि कस्टडी के मामलों में सही कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए, शॉर्टकट नहीं चलेगा।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट: शादी में दिए उपहारों
अदालती फैसले

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट: शादी में दिए उपहारों , को लेकर असंतोष जताना 'क्रूरता' नहीं

यह मामला मोहाली के खरड़ थाने का है। पत्नी ने साल 2015 में शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने आरोप लगाया था कि पति और उसके परिवार...

ग्वालियर हाईकोर्ट : पति से नहीं तय होगा
अदालती फैसले

ग्वालियर हाईकोर्ट : पति से नहीं तय होगा , महिला का ओबीसी क्रीमीलेयर स्टेटस

कोर्ट ने कहा-पति की सैलरी से नहीं बल्कि मां-पिता की सामाजिक-आर्थिक दशा से तय होगाी ओबीसी क्रीमीलेयर

सुप्रीम कोर्ट : दहेज हत्या समाज के लिए कलंक
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : दहेज हत्या समाज के लिए कलंक

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल भी उठाए

मप्र हाईकोर्ट  : गृहणी परिवार को कई तरह की
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट  : गृहणी परिवार को कई तरह की , सेवाएं देती है, वह अकुशल मज़दूर नहीं

कोर्ट ने दुर्घटना में महिला की मौत के बाद मुआवज़ा बढ़ाया

 इलाहाबाद हाईकोर्ट : विधवा को अपने
अदालती फैसले

 इलाहाबाद हाईकोर्ट : विधवा को अपने , ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार

कानून के अनुसार, महिला तभी यह दावा कर सकती है जब वह अपनी कमाई, अपनी संपत्ति, अपने माता-पिता या बच्चों की संपत्ति से अपना...