आगर-मालवा जिले के छोटे से ग्राम रलायती की रहने वाली भग्गू बाई आज आत्मनिर्भरता और सफलता की मिसाल बन चुकी हैं। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन यापन करने वाली भग्गू बाई ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर एक प्रेरणादायक कहानी रच दी है, जो पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई है।
परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, जिससे उनका जीवन लगातार संघर्षों से घिरा रहा। इसी दौरान वे आजीविका मिशन से जुड़ीं और स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। यही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। मिशन के माध्यम से उन्हें जैविक खाद यानी वर्मी कम्पोस्ट बनाने का प्रशिक्षण मिला। इस प्रशिक्षण ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया और उन्होंने जनवरी 2021 में एक छोटी-सी जैविक खाद इकाई शुरू करने का साहसिक निर्णय लिया।
शुरुआत आसान नहीं थी। खाद तैयार होने के बावजूद बाजार नहीं मिल पा रहा था और मेहनत का उचित लाभ भी नहीं मिल रहा था। लेकिन भग्गू बाई ने हार नहीं मानी। उन्होंने गांव-गांव जाकर किसानों को जैविक खेती के फायदे बताए और रासायनिक खाद के नुकसान समझाए। धीरे-धीरे किसानों का भरोसा बढ़ा और उनकी जैविक खाद की मांग भी बढ़ने लगी। आजीविका मिशन के सहयोग से उन्हें आजीविका ऋण, बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट और बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से मुद्रा लोन मिला। इससे उनके व्यवसाय को मजबूती मिली और उत्पादन लगातार बढ़ता गया।
आज भग्गू बाई द्वारा तैयार जैविक खाद आगर, उज्जैन और शाजापुर जिलों के किसानों, नर्सरियों और गौशालाओं तक पहुंच रही है। आजीविका मिशन द्वारा आयोजित जैविक बाजार और प्रदर्शनियों में लगाए गए स्टॉल ने उन्हें नई पहचान और स्थायी बाजार दिलाया।
जनवरी 2021 से अब तक वे करीब 700 क्विंटल जैविक खाद तैयार कर चुकी हैं और प्रति वर्ष लगभग 3.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमा रही हैं। अपनी मेहनत की कमाई से मोटरसाइकिल खरीदना उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक है। आज भग्गू बाई न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : कलेक्टर आगर-मालवा फेसबुक



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