ताइक्वांडो खिलाड़ी सपना शर्मा ने नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों पैरों में पोलियो के बावजूद सपना ने लगातार चौथी बार राष्ट्रीय स्वर्ण पदक हासिल किया, वह ऐसा करने वाली देश की पहली दिव्यांग खिलाड़ी बनी हैं।
28-29 मार्च को बेंगलुरू के कोरामंगला स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता में 70 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। फाइनल मुकाबले में सपना ने बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास के साथ अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित किया। सपना का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा और उन्होंने हर मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा।
दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद नहीं मानी हार
सपना की सफलता के पीछे संघर्ष और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है। दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। टेबल टेनिस में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने आर्म रेसलिंग में भी पदक जीता। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वे अपनी पहचान बना चुकी हैं और कई सम्मान हासिल कर चुकी हैं। आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने निरंतर अभ्यास जारी रखा। सपना का कहना है कि मजबूत हौसलों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती, और उनका लक्ष्य देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीतना है।
हर मुश्किल को बनाया ताकत
सपना का कहना है कि मेरे जीवन में सबसे बड़ी चुनौती मेरी शारीरिक स्थिति रही है। आर्थिक समस्याएं, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां भी थीं। कई बार ऐसा हुआ कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित होने के बावजूद आर्थिक कारणों से नहीं जा पाई लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। हर मुश्किल को अपनी ताकत बनाया और लगातार आगे बढ़ती रही।



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