सुबह का वक्त… बच्चे को बस स्टॉप छोड़ने जाती एक मां… और हवा में घुली सूखी पत्तियां जलने की बदबू।
अधिकतर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कुहू शर्मा kuhu-sharma ने वहीं खुद से एक सवाल पूछा “क्या इन पत्तियों को जलाने के बजाय बेहतर तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता?”
यही सवाल आगे चलकर उनके लिए मिशन बन गया। आज कुहू शर्मा एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ क्लाइमेट चेंज वेस्ट मैनेजमेंट और स्किल डेवलपमेंट जैसे विषयों पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
Young Indians Bhopal Chapter की चेयर के रूप में वे युवाओं खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। प्रोफेशनल जिम्मेदारियों और सामाजिक बदलाव के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने भोपाल में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की नई सोच को बढ़ावा दिया है।
बचपन का सपना बना पहचान
कुहू बताती हैं कि चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना उन्होंने बचपन में ही देख लिया था। इस सफर में उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया।
उन्होंने CA की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की जिसके बाद उन्हें ITC Limited जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने का अवसर मिला। शादी के बाद पति और ससुराल परिवार ने भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। बाद में उन्होंने दौलतराम ग्रुप के साथ जुड़कर अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
वे कहती हैं “मेरे फादर इन लॉ का मार्गदर्शन मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा। परिवार के सपोर्ट ने मुझे हर जिम्मेदारी को आत्मविश्वास के साथ निभाना सिखाया।” आज वे कंपनी का पूरा फाइनेंस और अकाउंट्स मैनेजमेंट संभाल रही हैं।
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जब सूखी पत्तियां बनीं बदलाव की वजह
• क्लाइमेट चेंज और वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में उनका सफर किसी सेमिनार से नहीं बल्कि रोजमर्रा के अनुभव से शुरू हुआ।
• बस स्टॉप के पास जलती सूखी पत्तियों से निकलने वाला धुआं उन्हें परेशान करता था। तभी उन्होंने सोचा कि इन पत्तियों का बेहतर उपयोग क्यों नहीं हो सकता।
• यहीं से उन्होंने गार्डन कंपोस्टिंग और फूड कंपोस्टिंग पर काम शुरू किया। उन्होंने ऐसे कंपोस्टिंग इक्विपमेंट तैयार किए जिन्हें नगर निगम ने भी अपनाया।
• आज भोपाल के कई गार्डन्स में सूखी पत्तियों से खाद तैयार की जा रही है।
2500 पेड़ों का संकल्प
क्लाइमेट एक्शन को लेकर कुहू शर्मा और उनकी टीम लगातार काम कर रही है। हाल ही में आयोजित Western Region Council Meet के दौरान कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से 2500 पेड़ लगाए गए। इसके साथ ही उन्होंने अपनी कंपनी में बड़ा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करवाया ताकि वॉटर कंजर्वेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
Young Indians से मिला बड़ा मंच
• Young Indians CII की यूथ विंग है जिसके देशभर के 72 शहरों में चैप्टर्स हैं। कुहू पिछले कई वर्षों से इससे जुड़ी हैं।
• यह संगठन रोड सेफ्टी क्लाइमेट चेंज एंटरप्रेन्योरशिप हेल्थ स्पोर्ट्स एक्सेसिबिलिटी और चाइल्ड सेफ्टी जैसे विषयों पर देशभर में काम करता है।
अब फोकस स्किल डेवलपमेंट पर
• Young Indians Bhopal Chapter की चेयर के रूप में उनका कार्यकाल एक साल का है और इस दौरान उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता स्किल डेवलपमेंट है।
• वे कॉलेज और स्कूल स्टूडेंट्स के लिए इंडस्ट्री और एकेडमिक गैप कम करने पर काम कर रही हैं ताकि युवा सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि इंडस्ट्री रेडी स्किल्स के साथ आगे बढ़ें।
• इसके अलावा वे भोपाल के बढ़ते AQI और सड़कों की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी काम करना चाहती हैं।
महिलाओं के लिए सबसे बड़ी सीख
कुहू मानती हैं कि महिलाओं के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम बेहद जरूरी है। वे कहती हैं “जब परिवार साथ खड़ा होता है तब महिलाएं प्रोफेशन और समाज दोनों में बदलाव ला सकती हैं।”
सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क
छाया : कुहू शर्मा के फेसबुक अकाउंट से



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