सागर। बुंदेलखंड में आज भी बाल विवाह जैसी कुरीति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कभी बेटी को बोझ समझकर, तो कभी समाज में बदनामी के डर से कम उम्र में ही बेटियों की शादी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करना चाहते हैं।
ऐसे में कई मासूम बच्चियां समय से पहले विवाह के बंधन में बांध दी जाती हैं और जीवनभर शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा झेलती हैं। लेकिन सागर जिले की महिला पुलिस प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी के अथक प्रयासों से अब तक 550 से अधिक लड़कियां बालिका वधु बनने से बच चुकी हैं और आज शिक्षा प्राप्त कर अपना भविष्य संवार रही हैं।
बाल विवाह रोकने के लिए तैयार किया मजबूत सूचना तंत्र
सरकार द्वारा बाल विवाह रोकने के लिए कानून बनाए जाने के बावजूद यह कुरीति कई इलाकों में जारी है। कानून के पालन के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चलाते हैं।
इसी क्रम में मध्य प्रदेश पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम बाल विवाह की सूचना मिलने पर कार्रवाई करती है। सागर पुलिस की विशेष किशोर इकाई में वर्ष 2016 से पदस्थ प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी को वर्ष 2018 में बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
शुरुआत में संसाधनों और सूचनाओं की कमी के कारण कठिनाइयां आईं, लेकिन ज्योति तिवारी ने अपना मजबूत सूचना नेटवर्क तैयार किया। धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों से बाल विवाह की सूचनाएं मिलने लगीं। पुलिस और विशेष टीम की मदद से उन्होंने लगातार कार्रवाई की, जिसका असर पूरे जिले में दिखाई देने लगा। आज गांव-गांव में लोग उन्हें 'बाल विवाह रोकने वाली मैडम' के नाम से जानते हैं।
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पहली कार्रवाई में झेलना पड़ा भारी विरोध
ज्योति तिवारी बताती हैं कि जब उन्होंने 2018 में पहली बार बाल विवाह रुकवाने की कार्रवाई की, तब उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें सूचना मिली थी कि ओडिशा से एक नाबालिग लड़की को खरीदकर लाया गया है और उसकी शादी एक अधेड़ व्यक्ति से जबरन कराई जा रही है। जब पुलिस टीम गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने लड़की को छिपा दिया और करीब छह घंटे तक हंगामा चलता रहा।
आखिरकार टीम ने लड़की को खोज निकाला। पुलिस को देखते ही वह बच्ची रोते हुए ज्योति तिवारी से लिपट गई और बोली “मुझे शादी नहीं करनी।” इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस टीम को घेर लिया, लेकिन अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचने पर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। ज्योति तिवारी कहती हैं कि इस घटना ने उनके मन में बाल विवाह के खिलाफ लड़ने का दृढ़ संकल्प पैदा कर दिया।
7 वर्षों में रोके 550 बाल विवाह
पिछले सात वर्षों में ज्योति तिवारी ने सागर जिले में 550 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। उनका कहना है कि लोगों का भरोसा बढ़ने के साथ सूचना तंत्र भी मजबूत हुआ और बड़ी संख्या में लोग गुप्त रूप से बाल विवाह की जानकारी देने लगे। कई मामलों में विवाद भी हुए और केस दर्ज करने पड़े, लेकिन अधिकांश परिवार समझाइश के बाद बच्चियों के बालिग होने तक विवाह टालने के लिए तैयार हो गए।
अब भी जारी है बाल विवाह की कुरीति
ज्योति तिवारी मानती हैं कि तमाम प्रयासों के बावजूद बाल विवाह पूरी तरह बंद नहीं हो पाया है। उनके अनुसार मजदूर वर्ग के कई परिवार बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। वहीं मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में प्रेम संबंधों के डर से भी लोग जल्दी शादी कर देना चाहते हैं। कई बार समाज के ताने भी परिवारों पर दबाव बनाते हैं। यही कारण है कि आज भी बाल विवाह की सूचनाएं लगातार मिलती रहती हैं।
विशेष सेवा के लिए मिला प्रतिष्ठित सम्मान
हाल ही में 11 मई को भोपाल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा विशेष कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी को महिला एवं बाल संरक्षण, समाजसेवा और बाल विवाह रोकने में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'के.एफ. रुस्तमजी अतिविशिष्ट पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए उन्हें 12 बोर गन और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : ईटीवी
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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