इंदिरा आयंगर : जिन्होंने सेवा को बना लिया जीवन का लक्ष्य

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इंदिरा आयंगर : जिन्होंने सेवा को बना लिया जीवन का लक्ष्य

• रुखसाना मिर्ज़ा

लगभग 86 बरस की इंदिरा आयंगर के समाज सेवा का दायरा बड़ा व्यापक रहा। 1940 में आगरा में जन्मीं इंदिरा जी ने भोपाल में रह कर खुद को महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। महिलाओं को रोज़गार से जोड़ना हो या गैस पीड़ित महिलाओं की मदद करना हो वे हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। उम्र और सेहत की वजह से वे अब पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं, लेकिन उनके काम को अब उनकी बेटी आगे बढ़ा रही हैं।

इंदिरा जी भारत की सांस्कृतिक विविधता की जीती-जागती मिसाल हैं। उनके पिता शरदचंद्र घोषाल बंगाली थे। वे राज्य परिवहन निगम में काम करते थे और उनके तबादले होते रहते थे। श्री घोषाल का विवाह फ्रेंच महिला मेक्डलीन बॉर्बन से हुआ था  जो फ्रेंच बॉर्बन परिवार से ताल्लुक रखती थीं। भारतीय और यूरोपीय संस्कारों के साथ पली-बढ़ीं इंदिरा जी का विवाह 1976 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.पीके आयंगर से हुआ।

पारिवारिक इतिहास

इंदिरा जी भोपाल के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले बॉर्बन परिवार की वंशज हैं। इंदिराजी अपनी पुस्तक ‘द बोर्बोंस एंड बेगम्स ऑफ़ भोपाल : द फॉरगोटेन हिस्ट्री(‘The Bourbons and Begums of Bhopal: The Forgotten History') में अपनी माँ मैग्डलीन बॉर्बन की वंशावली जीन फिलिप डी बॉर्बन से जुड़ा मानती हैं, जो फ़्रांस के शाही घराने हाउस ऑफ़ बॉर्बन के सदस्य थे। अयंगर के अनुसार, जीन फिलिप ने खुद 1605 या 1606 ई. में जहाँगीर के सामने एक दस्तावेज़ पेश किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वे चार्ल्स कोनेटेबल डी बॉर्बन के पुत्र हैं और उन्हें फ्रांस से इसलिए भागना पड़ा था क्योंकि उन्होंने अपने ही नकली अंतिम संस्कार का नाटक रचकर अपनी मौत की अफ़वाह फैला दी थी।

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गरा आर्चडायोसीज़ के अभिलेखागार के दस्तावेजों से इस बात की भी पुष्टि होती है कि जीन फिलिप डी बॉर्बन फ़्रांस से मुगलकालीन भारत में आए और बादशाह अकबर के दरबार से जुड़े, उनकी सेवा से प्रसन्न होकर अकबर ने उनका विवाह अपनी ईसाई बेगम की बहन लेडी जुलियाना से करवाई और वर्तमान मध्यप्रदेश के नरवर के पास स्थित शेरगढ़ रियासत भेंट में दी। लेडी जुलियाना स्वास्थय और चिकित्सा का ज्ञान रखने के कारण बादशाह के हरम में महिलाओं के स्वास्थय की देखभाल करती थीं। 1737 तक नादिर शाह द्वारा दिल्ली पर आक्रमण किये जाने तक मुग़ल दरबार में उनका सम्मान बना रहा। 1778 में शेरगढ़ पर नरवर के पुराने राजाओं का आक्रमण हुआ और रियासत हाथ से जाती रही, परिवार के कई सदस्यों को खो देने के बाद जीन फिलीप के पोते सल्वाडोर द्वितीय और उनके दो पुत्र पहले ग्वालियर और अंततः भोपाल आकर बस गए। कालान्तर में बॉर्बन परिवार भोपाल में नवाबों के बाद सबसे अधिक प्रभावशाली परिवारों में शुमार होने लगा जिसकी वंशज है इंदिरा आयंगर

बचपन से ही समाज सेवा में रुचि

बचपन से ही इंदिरा आयंगर मदर टेरेसा से प्रभावित रहीं और किशोरावस्था से ही वे मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी से जुड़ गईं। वे इस संस्था के भोपाल स्थित केन्द्र में जाकर कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीजों की सेवा करने लगीं। इंदिरा जी ने राजनीति विज्ञान में एमए किया था लेकिन राजनीति में उनकी दिलचस्पी कभी नहीं रही।

महिलाओं के लिए बनाया महाशक्ति सेवा केन्द्र

1984 में भोपाल गैस त्रासदी में इंदिरा जी ने बहुत सेवा कार्य किए। कई महिलाएं विधवा हो गई थीं। उनके सामने बच्चों की परवरिश की समस्या थी। ऐसी महिलाओं को रोज़गार से जोड़ने के लिए उन्होंने काम शुरू किया। तब जगह की समस्या थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मंत्री अर्जुन सिंह ने उन्हें तीन शेड दिलवाए जहां महिलाओं को रोज़गारपरक काम सिखाने की शुरुआत हुई। महिलाओं को सिलाई कढ़ाई, भोपाली बटुए और जूट के बैग बनाने सहित अन्य हस्तशिल्प की ट्रेनिंग शुरू की। सैकड़ों महिलाएं ट्रेनिंग ले रही थीं लेकिन औपचारिक रूप से संस्था का कोई नाम नहीं था। 1993 में महाशक्ति सेवा केन्द्र की स्थापना की। इंदिरा जी ने कौशल विकास के सरकार के कुछ प्रोजेक्ट में झाबुआ, अलीराजपुर के आदिवासी अंचल में भी काम किया और आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की।

5 हज़ार से ज़्यादा महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

महाशक्ति सेवा केन्द्र की स्थापना के बाद से सेवा गतिविधियों को और विस्तार हुआ। महिलाओं को केवल सिलाई कढ़ाई ही नहीं बल्कि जूट के सजावटी सामान, ब्लॉक प्रिंटिंग, कलमकारी, जरदोज़ी आदि भी सिखाई जाती हैं। कपड़ों की छोटी-छोटी कतरनों से बैग, गुडिय़ा और सुंदर सजावटी सामान बनाना भी सिखाया जाता है। द्वारका नगर में तीन शेड हैं जहां कंप्यूटर सेंटर भी है। केन्द्र से अब तक पांच हज़ार से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। केन्द्र में बने सजावटी सामान कई बड़े होटल्स में खरीदे जाते हैं। 2107 से शुरू हुई स्वास्थ्य समस्याओं के चलते अब महाशक्ति सेवा केन्द्र का काम उनकी बेटी पूजा आयंगर देखती हैं। दूसरी बेटी राधिका अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सस्टेनेबल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की डायरेक्टर हैं।

सन्दर्भ स्रोत :  इंदिरा आयंगर की पुत्री  पूजा आयंगर से रुखसाना मिर्जा की बातचीत एवं पारिवारिक इतिहास इंदिराजी की पुस्तक The Bourbons and Begums of Bhopal: The Forgotten History पर आधारित

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