नई दिल्ली। राजस्थान की राजधानी जयपुर की एक फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किया गया आचरण वैवाहिक रिश्तों की नींव को प्रभावित कर सकता है।
न्यायाधीश ने कही ये बात
पारिवारिक न्यायालय क्रम संख्या (एक) की न्यायाधीश आरती भारद्वाज ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि कोई विवाहित महिला किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें खिंचवाती है और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करती है, तो यह पति के प्रति 'मानसिक क्रूरता' की श्रेणी में आता है।
पति के वकील डीएस शेखावत ने इस आदेश की जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि सोशल मीडिया पर की गई गतिविधियां और ऑनलाइन व्यवहार अब वैवाहिक विवादों में प्रासंगिक सबूत माने जा सकते हैं, खासकर जब इनसे पति या पत्नी को अपमान या भावनात्मक आघात पहुंचता हो।
मुख्य आरोप
पति ने अदालत में अपनी पत्नी पर दुर्व्यवहार, अपशब्दों का प्रयोग और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया। साथ ही उसने यह भी कहा कि पत्नी उसे अपने माता-पिता से अलग होने के लिए लगातार दबाव डालती थी। हालांकि, मामले में मुख्य मुद्दा पत्नी का सोशल मीडिया व्यवहार ही रहा।
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक तस्वीरें साझा करने से पति को गंभीर भावनात्मक पीड़ा होती है और उसकी गरिमा व सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि कोई विवाहित महिला किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें खिंचवाती है और उन्हें सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा करती है, तो यह आचरण पति के लिए मानसिक क्रूरता के समान है।



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