मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव की रहने वाली तृप्ति कठैल आज अनाथ और बेसहारा बेटियों के लिए उम्मीद की मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने अब तक 80 से अधिक बेटियों को गोद लेकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा और आत्मनिर्भर बनने की जिम्मेदारी उठाई है। बच्चे उन्हें प्यार से ‘दीदी मां’ कहकर बुलाते हैं।
समाज सेवा को समर्पित किया जीवन
तृप्ति कठैल ने अपने परिवार से मिले समाजसेवा के संस्कार को आगे बढ़ाते हुए पूरा जीवन समाज के नाम कर दिया। वह शोभा देवी सामाजिक सेवा समिति की अध्यक्ष हैं और वर्षों से महिलाओं और बेटियों के लिए लगातार काम कर रही हैं।
बेटियों के लिए नहीं की शादी
तृप्ति का कहना है कि उन्होंने आजीवन शादी न करने का फैसला इसलिए लिया ताकि अनाथ बेटियों की परवरिश और उनके भविष्य में कोई बाधा न आए। उनका मानना है कि विवाह के बाद परिस्थितियां बदल सकती थीं, जिससे उनका सामाजिक मिशन प्रभावित होता।
हर महीने देती हैं आर्थिक सहायता
संस्था द्वारा गोद ली गई बेटियों के खातों में तृप्ति हर महीने 500 रुपए जमा करवाती हैं। इसके साथ ही उनकी Education, हुनर विकास और आत्मनिर्भरता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
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‘दीदी मां’ शब्द देता है सुकून
तृप्ति कहती हैं कि गोद ली हुई बेटियां ही अब उनका परिवार हैं। बच्चों द्वारा ‘दीदी मां’ कहकर बुलाना उन्हें सबसे ज्यादा खुशी और सुकून देता है। यही वजह है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन बेटियों के नाम समर्पित कर दिया।
बेटियों के लिए बनेगा नया आश्रय गृह
तृप्ति ने बताया कि संस्था के 10वें स्थापना दिवस पर उनकी मां शकुंतला कठैल ने आधा बीघा जमीन संस्था को दान में दी। अब जनसहयोग से वहां बेटियों के रहने और उनके Skill Development के लिए नया आश्रय गृह बनाया जाएगा।
24 बेटियों की शादी करा चुकी संस्था
साल 2013 से अब तक संस्था प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 24 से अधिक बेटियों की शादी करा चुकी है। संस्था की ओर से जरूरत का घरेलू सामान भी उपलब्ध कराया जाता है।
तृप्ति कठैल का यह अनोखा सेवा कार्य पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग उन्हें अनाथ बेटियों की मसीहा और समाज के लिए प्रेरणा मान रहे हैं।
सन्दर्भ स्रोत : ईटीवी
छाया : तृप्ति कठैल के फेसबुक अकाउंट से
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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