ग्लोरिया भभोर: बचपन में घरों की दीवार रंगती

blog-img

ग्लोरिया भभोर: बचपन में घरों की दीवार रंगती
थीं, अब लगा रहीं एग्जीबिशन

छाया: एमपी ट्राइबल म्यूजियम डॉट कॉम

जनजातीय संग्रहालय: 41वीं शलाका प्रदर्शनी में ग्लोरिया के चित्रों की प्रदर्शनी

भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय  के 'लिखन्दरा प्रदर्शनी दीर्घा'  में चित्रकार ग्लोरिया भभोर के चित्रों की प्रदर्शनी शुरू हुई। 41वीं शलाका चित्र प्रदर्शनी 30 सितंबर तक चलेगी। वर्ष 1989 में झाबुआ जन्मी ग्लोरिया 10 साल से पेंटिंग बना रही हैं। जनजातीय संग्रहालय में उनकी 27 पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगी है।

हर हफ्ते बनाती हैं 1 से 2 पेंटिंग

ग्लोरिया बताती हैं उन्हें बचपन से ही पेंटिंग्स करना बहुत पसंद था। बचपन से घरों की दीवारों को रंगना, सजाना और आंगन में रंगोली बनाना अच्छा लगता था। बचपन में वे मिट्टी और चुना से पेंटिंग किया करती थीं। 2012 में राकेश भभोर से शादी के बाद भोपाल आईं और काम की तलाश में अपने रिश्तेदार भील समुदाय के चित्रकार दुबू बारिया से भील पेंटिंग सीखकर, चित्रकारी में उनकी मदद करने लगीं। 2012 से उन्हें भील पेंटिंग बनाने की प्रेरणा मिली और तब से आज तक वो रुकी नहीं और हर हफ्ते 1 से 2 पेंटिंग जरूर बनाती हैं। लगभग 10 वर्षों से चित्रकारी कर रहीं ग्लोरिया को चित्रों में प्राकृति चित्र जैसे पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और जंगली जानवरों की झलक दिखाना बेहद पसंद है। 10 साल की अपनी इस यात्रा में वे कई कला-प्रदर्शनियों और चित्र- शिविरों में भाग ले चुकी हैं ।

सन्दर्भ स्रोत: दैनिक भास्कर

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



गरीबी से सफलता तक: मध्यप्रदेश की
न्यूज़

गरीबी से सफलता तक: मध्यप्रदेश की , भगवती देवी बनीं ट्रैक्टर उद्यमी

हरदोली गांव की महिला ने दिखाया संघर्ष और आत्मनिर्भरता का रास्ता

महिलाओं की संस्था 'सकारात्मक सोच'
न्यूज़

महिलाओं की संस्था 'सकारात्मक सोच' , ने बदली स्कूल और आंगनवाड़ी की तस्वीर

शिक्षा और पर्यावरण में योगदान- स्कूलों में अब वाटर कूलर, पंखे, एलईडी के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी

नो केमिकल हर्बल प्रोडक्ट से बीमारियों से
न्यूज़

नो केमिकल हर्बल प्रोडक्ट से बीमारियों से , सुरक्षा उज्जैन की छात्राओं का अनोखा नवाचार

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की छात्राओं ने बनाया हर्बल प्रोडक्ट, डेली यूज की चीजें, खाने पीने के सामान क...

मां यशोदा बनकर सैकड़ों कुपोषित बच्चों
न्यूज़

मां यशोदा बनकर सैकड़ों कुपोषित बच्चों , को नई जिंदगी  दे रही रीवा की ममता

सामाजिक सेवा से मिलती है संतुष्टि - आठ साल पहले पहली बार 47 अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था।