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• गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
भोपाल। नंदिनी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड एकाउंटेंट माना है। नंदिनी अग्रवाल ने 2021 में सीए फाइनल में देश में टॉप किया था। 13 सितंबर 2021 को वो 19 साल और 330 दिन की थीं, जब उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। नंदिनी के बड़े भाई सचिन (तब 21) ने ऑल इंडिया में 18वीं रैंक हासिल की थी। नंदिनी के अनुसार उनके बड़े भाई दो क्लास आगे थे, लेकिन नंदिनी ने दो क्लास जंप करके 10वीं की परीक्षा दी थी।
नंदिनी सामान्य परिवार से आती हैं। नंदिनी के पिता टैक्स कंसल्टेंट हैं और मां गृहिणी हैं। टॉपर नंदिनी की ये कोई पहली सफलता नहीं हैं। इसके पहले 12वीं की परीक्षा में भी उन्होंने टॉप किया था। नंदिनी ने मुरैना के विक्टर कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की है। साल 2017 में नंदिनी ने 12वीं की परीक्षा में 94.5 फीसदी अंक प्राप्त किये थे। इसके पहले आईपीसीसी परीक्षा में उन्होंने एआईआर 31वीं रैंक हासिल की थी।
सीए फाइनल में नंदिनी को 800 में से 614 अंक मिले। नंदिनी के मुताबिक, मॉक टेस्ट में उन्हें खराब अंक मिले थे, जिसकी वजह से वह हतोत्साहित हो गयीं थीं। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फैसला लिया कि भले ही मॉक टेस्ट खराब हुआ हो लेकिन फाइनल एग्जाम में वह अच्छा प्रदर्शन करके अंक कवर कर लेंगी। नंदिनी बताती हैं कि उनके भाई ने उन्हें परीक्षा की तैयारी के दौरान बहुत प्रोत्साहित किया। नंदिनी ने कहा कि जब वो 11वीं कक्षा में थीं, तब एक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक उनके स्कूल आए थे। नंदिनी ने कहा, 'तभी से मैंने एक ऐसा रिकॉर्ड हासिल करने का सपना देखा, जिसे तोड़ना मुश्किल हो।'
नंदिनी के पिता नरेश अग्रवाल ने बताया कि नंदिनी हमेशा जल्दबाजी में रहती थी इन्होंने दो क्लास जंप करते हुए मात्र 13 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की, फिर 15 की उम्र में 12 वीं और मात्र 19 साल की उम्र में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला।
शिक्षक मनोज बंसल बताते है कि यह दोनो भाई बहन साथ में ही पढ़ते थे और नंदिनी बेहद मेहनती है इनकी सफलता में इनके भाई का भी अहम रोल है जब नंदिनी को मॉक टेस्ट में खराब अंक मिलते थे तो सचिन इनकी मदद करता था।
35 लाख के पैकेज में हुआ चयन
फिलहाल नंदिनी मुंबई एक कंपनी में 35 लाख सालाना के पैकेज पर काम कर रही है। नंदिनी बताती हैं ‘छोटी कंपनियां भी मुझे 16 साल की उम्र में लेने के लिए तैयार नहीं थीं' मुझे ट्रेनिंग करने में बहुत कठिनाई हुई। हालांकि इस तरह की असफलताओं ने मुझे उनसे आगे निकलने के लिए और अधिक दृढ़ बना दिया।'
संदर्भ स्रोत: पत्रिका/अमर उजाला
संपादन: मीडियाटिक डेस्क



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