सीमा वर्मा : सेवानिवृत्ति के बाद गांवों

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सीमा वर्मा : सेवानिवृत्ति के बाद गांवों
में जाकर संभाली समाज की जिम्मेदारी

भोपाल की सीमा वर्मा, जिन्होंने 25 साल तक हवाई सेवा में कार्य किया, 2022 में सेवानिवृत्ति के बाद आराम करने के बजाय एक नई और सकारात्मक शुरुआत की दिशा में कदम बढ़ाया। उनके लिए यह समय खुद को पुनः खोजने और समाज के लिए कुछ ऐसा करने का था, जिससे लोगों की जिंदगी में वास्तविक बदलाव आ सके। इस सोच के साथ उन्होंने अपनी समाज सेवा की यात्रा की शुरुआत रायसेन जिले के गांव भोजपुर से की, जहां उन्होंने अपनी सेवाओं को गांव वालों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के लिए निरंतर कार्य

सीमा ने बताया कि 2016 में उन्होंने भोपाल के पास एक गांव में जमीन खरीदी और 2019 में एक गांव को गोद लेकर वहां स्वास्थ्य, शिक्षा, रसायन मुक्त खेती, पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करना शुरू किया। हालांकि, उस समय नौकरी के कारण वह भोपाल में स्थायी रूप से नहीं रह पाती थीं, लेकिन वे बीच-बीच में आकर वहां काम करती थीं। उनके पति एडमिरल बिमल वर्मा, जो भारतीय नौसेना से सेवा निवृत्त हो चुके थे, 2020 में भोपाल आ गए। कोविड महामारी के कारण सीमा को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा मिल गई, जिससे उन्हें गांवों की जरूरतों को और बेहतर तरीके से समझने का मौका मिला। 2022 में सेवानिवृत्ति के बाद वे भी स्थायी रूप से भोपाल आ गईं और अपने कार्यों को और व्यापक स्तर पर फैलाने का संकल्प लिया।

सक्षम-समाज और सेंटर ऑफ रूरल एम्पावरमेंट: एक नई पहल

सेवा निवृत्त होने के पहले उन्होंने 2020 में अपना एनजीओ 'सक्षम - सोसाइटी फॉर एम्पावरिंग रूरल एरियाज' स्थापित किया और दिसंबर 2024 में सेंटर ऑफ रूरल एम्पावरमेंट की स्थापना की। इस संस्था के तहत वे 11 गांवों में महिलाओं को मेनस्ट्रुअल हेल्थ के बारे में जागरूक कर रही हैं, मुफ्त में मेनस्ट्रुअल कप वितरित कर रही हैं और डॉक्टरों की टीम के साथ स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दे रही हैं। इसके अलावा, सीमा वर्मा ने ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्लॉक प्रिंटिंग, कंप्यूटर क्लासेस और छात्रों के लिए स्मार्ट क्लासेस जैसी योजनाओं की शुरुआत की है। उनका उद्देश्य इन योजनाओं के माध्यम से गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है, ताकि ग्रामीण लोग एक आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन जी सकें।

सीमा बताती हैं शुरुआत में, उन्होंने यह सब अपने दोस्तों की आर्थिक मदद और अपनी बचत से किया। उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन भी उन्हें आर्थिक सहयोग दे रहा है, जिससे उनका अभियान और भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

प्रकृति से जुड़ने का संदेश और केमिकल-फ्री खेती

सीमा का मानना है कि असली बदलाव गांवों से ही शुरू होता है। उन्हें पुणे के डॉ. गणेश नटराजन से प्रेरणा मिली, जो ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम कर रहे थे। उन्होंने समझा कि गांवों को तरक्की की दिशा में ले जाने के लिए वहां के लोगों को प्रकृति से जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के साथ, उन्होंने किसानों को केमिकल-फ्री खेती की सलाह दी और उन्हें प्रकृति से जुड़ने का संदेश दिया। हालांकि, इस काम की शुरुआत में उन्हें समाज और यहां तक कि अपने परिवार से भी विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

सम्मान और योगदान

सीमा वर्मा को उनके समाज सेवा कार्य के लिए कई बार सम्मानित किया गया है। 2017 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप में नेशनल स्वच्छता अवार्ड से नवाजा गया था, जो उनकी स्वच्छता के प्रति किए गए योगदान की सराहना थी।

स्किल डेवलपमेंट की महत्ता

सीमा कहती हैं, "मेरा उद्देश्य है कि स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान दिया जाए। केवल पढ़ाई से कुछ नहीं होगा। हमें ज्ञान का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए। हम बच्चों और महिलाओं को कंप्यूटर, गणित, लैंग्वेज और अन्य कौशल सिखाते हैं, जिससे वे अपने जीवन को बेहतर बना सकें।" उनका मानना है कि अगर किसी को हुनर सीखने का मौका मिले, तो वह अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकता है।

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