मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के जावरा की रहने वाली बबली गंभीर ने जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद अपने हौसले और मेहनत से ऐसी मिसाल कायम की है, जो नारी सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी बन चुकी है। दोनों हाथ छोटे होने और हर हाथ में केवल तीन उंगलियां होने के बावजूद उन्होंने अपनी कमी को ही अपनी ताकत बना लिया। आज वे देश की प्रसिद्ध ब्यूटीशियन हैं और सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दे रही हैं।
बबली बताती हैं कि जब उनका जन्म हुआ तो परिवार के लोग हैरान रह गए। उनके दोनों हाथ सामान्य से छोटे और विकृत थे। एक परिचित ने उनके पिता को यहां तक सलाह दे दी कि इस बच्ची को जहर दे दो, वरना यह परिवार पर बोझ बन जाएगी। लेकिन उनके पिता समाज की रूढ़िवादी सोच के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया और बचपन से ही उसके हाथों में पेंसिल थमा दी। यहीं से बबली के आत्मविश्वास और प्रतिभा की शुरुआत हुई।
चुनौतियों ने बनाया मजबूत
महज छह साल की उम्र में बबली ने अपने पिता को खो दिया। इसके बाद उन्हें बड़े भाई के साथ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने भेजा गया। अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के कारण शुरुआत में उनका आत्मविश्वास कमजोर हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दसवीं के बाद जावरा लौटने के बाद उन्होंने अंग्रेजी विषय में मेहनत की और आगे चलकर अंग्रेजी साहित्य में बीए और एमए की पढ़ाई पूरी की।
सरकारी नौकरी छोड़ चुना अपना सपना
पढ़ाई पूरी करने के बाद बबली को शिक्षक की सरकारी नौकरी भी मिली, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने ब्यूटीशियन बनने का फैसला किया, क्योंकि वे अपने हाथों के हुनर को दुनिया के सामने लाना चाहती थीं।
सीखते-सीखते वे इतनी कुशल हो गईं कि आज अपने ब्यूटी पार्लर ‘स्टूडियो शीन’ में न केवल महिलाओं को सौंदर्य सेवाएं देती हैं, बल्कि कई युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
राष्ट्रपति पुरस्कार सहित कई सम्मान
बबली को वर्ष 2013 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें सरोजिनी नायडू पुरस्कार सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। वे देश की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में भी शामिल हो चुकी हैं और आज भी जावरा में रहकर महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं।
बबली की बड़ी बहन बलजीत कौर बताती हैं कि बबली बचपन से ही अपने सारे काम खुद करना चाहती थीं। उन्हें किसी की मदद लेना पसंद नहीं था। एक काम ऐसा था जो वे खुद नहीं कर पाती थीं—अपने बालों की चोटी बनाना। जब उन्हें पढ़ाई के लिए हॉस्टल जाना पड़ा तो उन्होंने खुद ही कैंची से अपने बाल काट लिए, ताकि किसी पर निर्भर न रहना पड़े।
बबली अपने ब्यूटी स्टूडियो में सैकड़ों युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके साथ काम करने वाली युवतियां बताती हैं कि बबली दीदी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया है और हर समस्या में उनका मार्गदर्शन करती हैं।
सन्दर्भ स्रोत : ईटीवी भारत
छाया : बबली गंबीर के फेसबुक अकाउंट से
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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