खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के छोटे से खेड़ी गांव की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि हौसला, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो एक साधारण पेड़ भी आर्थिक क्रांति की वजह बन सकता है। सहजन (मोरिंगा/सुरजना फली), जिसे कभी सामान्य पौधा समझा जाता था, आज गांव की महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुका है।
आज ये महिलाएं सहजन से जुड़े विभिन्न उत्पाद बनाकर न केवल स्थानीय बाजार बल्कि देश के कई बड़े शहरों तक अपनी पहचान बना रही हैं।
मोरिंगा की बढ़ती मांग ने बदली किस्मत
ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी अंतिम पटेल और उनकी टीम ने बाजार में मोरिंगा पाउडर की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया। शुरुआत खेती से हुई, लेकिन बाद में महिलाओं ने प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम भी संभाल लिया।
महिलाएं खेतों से सहजन की पत्तियां तोड़कर उन्हें साफ करती हैं, धूप में सुखाती हैं और बिना किसी रासायनिक पदार्थ के शुद्ध मोरिंगा पाउडर तैयार करती हैं। यह पाउडर आज नेचुरल हेल्थ सप्लीमेंट के रूप में बाजार में लोकप्रिय हो रहा है।
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सहजन से तैयार हो रहे कई उत्पाद
खेड़ी गांव की महिलाओं ने सहजन को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उससे कई तरह के उत्पाद तैयार किए हैं
• मोरिंगा पाउडर : हेल्थ ड्रिंक और पोषण सप्लीमेंट
• हर्बल टी बैग : कैफीन-फ्री स्वास्थ्यवर्धक चाय
• कैप्सूल और टैबलेट : पौष्टिक सप्लीमेंट
• सहजन की फलियों से सब्जी और सूप
• फ्रोजन ड्रमस्टिक : लंबे समय तक उपयोग और निर्यात के लिए
• मोरिंगा ऑयल (बेन ऑयल) : त्वचा और बालों की देखभाल के लिए
• पानी शुद्ध करने वाला पाउडर : बीजों से तैयार प्राकृतिक उत्पाद
• हर्बल साबुन और लोशन
• जैविक खाद (बायो फर्टिलाइजर)
दिल्ली से मुंबई तक पहुंच रहे उत्पाद
खेड़ी गांव की महिलाओं के उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं। दिल्ली, मुंबई, इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे शहरों में भी इनकी मांग बढ़ रही है। इसके अलावा विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी उत्पादों की बिक्री लगातार बढ़ रही है।
क्यों खास है सहजन?
सहजन (मोरिंगा) को अक्सर ‘चमत्कारी पेड़’ कहा जाता है। इसकी पत्तियां, फलियां, फूल और बीज सभी उपयोगी होते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन्स, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे एक सुपरफूड बनाते हैं।
25 से ज्यादा महिलाओं को मिला रोजगार
• इस पहल से गांव की 25 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
• जो महिलाएं पहले केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वे आज सफल उद्यमी बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
• यह सफलता कहानी बताती है कि आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत गांवों में रहने वाली महिलाएं हैं। सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर वे न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर भी बदल सकती हैं।
सन्दर्भ स्रोत : न्यूज़ 18



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