राधा सिसोदिया: इंजीनियरिंग की नौकरी

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राधा सिसोदिया: इंजीनियरिंग की नौकरी
छोड़ जैविक खेती से कमा रहीं लाखों

उज्जैन से 19 किमी दूर दताना गांव की राधा सिसोदिया ने साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही अवसर और प्रशिक्षण मिले तो वे आधुनिक तकनीक के माध्यम से खेती में क्रांति ला सकती हैं। किसान परिवार में जन्मी राधा ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी की, लेकिन मन गांव और खेती में ही रमा रहा नतीजा, नौकरी छोड़कर उन्होंने जैविक खेती की राह चुनी और आज वे उज्जैन विकासखंड की पहली महिला ड्रोन पायलट के रूप में जानी जाती हैं। 

राधा आज केवल एक सफल किसान नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। आधुनिक तकनीक और परंपरागत खेती के संगम से उन्होंने यह साबित किया है कि खेती को भी लाभकारी और सम्मानजनक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

जैविक खेती से बदली किस्मत

राधा ने अपने पारिवारिक खेत की ढाई बीघा जमीन पर जैविक खेती की शुरुआत की। शुरुआत में जानकारी का अभाव था, इसलिए उन्होंने इंदौर और भोपाल में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्न्यास्त्र जैसे जैविक कीटनाशक, जीवामृत जैसे टॉनिक और वर्मी कंपोस्ट घर पर बनाकर उपयोग शुरू किया। परिणाम स्वरूप मिट्टी की गुणवत्ता सुधरी, उत्पादन बढ़ा और परिवार का भरोसा भी मजबूत हुआ। यही विश्वास आगे चलकर पूरे खेत को जैविक खेती में बदलने की नींव बना।आज उनकी सालाना आय 3 से 5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।  

गोबर से इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां और जैविक उत्पाद

राधा गाय के गोबर से इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं भी बनाती हैं। इसके साथ ही जैविक खाद और कीटनाशकों की सप्लाई मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी कर रही हैं। उनके उत्पादों की बढ़ती मांग ने उन्हें एक सफल ग्रामीण उद्यमी बना दिया है।

उज्जैन की पहली महिला ड्रोन पायलट बनीं ‘ड्रोन दीदी’

राधा उज्जैन विकासखंड की पहली महिला ड्रोन पायलट हैं। वे पिछले दो वर्षों से ड्रोन के माध्यम से किसानों की फसलों में दवा और उर्वरक का छिड़काव कर रही हैं। आज क्षेत्र की कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर ड्रोन प्रशिक्षण ले रही हैं।

सैकड़ों किसानों को दिया प्रशिक्षण

राधा ने भोपाल में डोमेस्टिक ट्रेनर परीक्षा पास कर सर्टिफाइड ट्रेनर का दर्जा प्राप्त किया। वे अब जैविक खेती, डेयरी फार्मिंग, वर्मी कंपोस्ट, बकरी पालन और मशरूम उत्पादन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दे रही हैं। अब तक वे 100 से अधिक स्थानों पर प्रशिक्षण दे चुकी हैं, जिनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के गांव शामिल हैं।

सन्दर्भ स्रोत : पत्रिका समाचार पत्र 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क 

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