छाया : सावित्री श्रीवास्तव के फेसबुक अकाउंट से
बचपन से ही पानी की बर्बादी देखकर मन व्यथित हो उठता था। पेड़-पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना उन्हें बेहद पसंद था। घर में लगे वाटर प्यूरीफायर से निकलने वाले वेस्ट वॉटर को जब अलग-अलग कामों में उपयोग होते देखा, तभी उनके मन में सवाल उठा—जब हम इस पानी को बचा सकते हैं, तो बारिश के पानी को क्यों नहीं? यहीं से शुरू हुआ वॉटर वूमन सावित्री श्रीवास्तव का जल संरक्षण का सफर। आज वे पूरे देश में ‘जल दूत’ के नाम से पहचानी जाती हैं। ग्वालियर निवासी सावित्री श्रीवास्तव को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने ‘वॉटर हीरो’ की उपाधि से सम्मानित किया है।
आर्मी परिवार से सामाजिक बदलाव तक का सफर
पंजाब के पटियाला में एक आर्मी मैन की बेटी के रूप में जन्मी सावित्री श्रीवास्तव की पढ़ाई देश के अलग-अलग राज्यों में हुई। पढ़ने की तीव्र इच्छा के बावजूद वे बीएससी तक ही पढ़ सकीं, क्योंकि पारंपरिक परिवार होने के कारण कम उम्र में ही उनका विवाह कर दिया गया। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के छोटे से कस्बे करैरा में विवाह के बाद सामाजिक कार्य करना आसान नहीं था। घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अपने विचारों को जमीन पर उतारना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
घर से शुरू हुआ जल संरक्षण अभियान
करीब 18 वर्ष पहले सावित्री श्रीवास्तव ने अपने घर से ही जल संरक्षण अभियान की शुरुआत की। नल से बहता पानी, वॉशबेसिन से निकलने वाला वेस्ट वॉटर, गाड़ी धोने में बर्बादी और बारिश का पानी यूं ही बह जाना-ये सब उन्हें भीतर तक परेशान करता था। उन्होंने समाधान खोजा और खुद प्रयास शुरू किए।
घर पर बनाई वर्षा जल संरक्षण किट
वर्षा जल संरक्षण का विचार आने के बाद सावित्री ने गहन रिसर्च की और यह समझा कि हमारे पूर्वज किस तरह जल संरक्षण करते थे। इसके बाद उन्होंने घर पर ही एक वाटर फिल्टर किट तैयार की, जिसे ड्राई बोरवेल से जोड़ा गया। बारिश का पानी छत से फिल्टर किट के माध्यम से सीधे ड्राई बोरवेल में पहुंचने लगा। पहली ही बारिश में बोरवेल में पानी आ गया, यह उनके लिए बड़ी सफलता थी।
अरबों लीटर पानी का संरक्षण
इस सफलता के बाद उन्होंने स्कूलों, मोहल्लों और दोस्तों के बीच छोटी-छोटी बैठकों के माध्यम से वर्षा जल संरक्षण का संदेश फैलाना शुरू किया। आज उनके प्रयासों से अब तक अरबों लीटर पानी का संरक्षण किया जा चुका है। वे हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में जल संरक्षण का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही वे हाईवे और सड़क किनारे रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, बंद पड़े कॉलेज, अस्पतालों और संस्थानों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी स्थापित कर चुकी हैं।
पहले उड़ता था मज़ाक, आज मिलती है सराहना
शुरुआत में लोगों ने उनके प्रयासों का मज़ाक उड़ाया, लेकिन वे डटी रहीं। आज वही लोग उनके काम की प्रशंसा करते हैं। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें ‘वॉटर हीरो’ सम्मान से नवाजा। सावित्री कहती हैं “धरती पर केवल 1.5 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है। यदि आज हमने इसे बचाने का प्रयास नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियों का जीवन गंभीर संकट में पड़ जाएगा।”
संदर्भ स्रोत : पत्रिका समाचार पत्र
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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