ग्वालियर। आमतौर पर शरीर में घाव होने पर उसे भरने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन अगर मरीज डायबिटीज से ग्रसित हो तो घाव भरना और भी मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में तो घाव ठीक होने की गारंटी तक नहीं रहती। ऐसे में ग्वालियर की डॉ. ललिता कुशवाह ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल क्रीम तैयार की है, जिससे डायबिटिक मरीजों के घाव 30 से 90 दिनों के भीतर भर गए।
नीम, एलोवेरा, गेंदा, करक्यूमिन और घमरा जैसे औषधीय पौधों से तैयार इस क्रीम का 200 से अधिक वालंटियर मरीजों पर सफल ह्यूमन ट्रायल किया जा चुका है। अब डॉ. ललिता इसे सस्ते दामों पर बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं।
7 साल के शोध के बाद तैयार हुआ हर्बल ऑइंटमेंट
ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में बायोकेमिस्ट्री विभाग की गेस्ट फैकल्टी रह चुकीं पीएचडी स्कॉलर डॉ. ललिता कुशवाह ने करीब 7 वर्षों की मेहनत और रिसर्च के बाद इस हर्बल ऑइंटमेंट को तैयार किया है। यह खासतौर पर उन मरीजों के लिए विकसित किया गया है, जो डायबिटीज के कारण लंबे समय तक न भरने वाले घावों से जूझते हैं।
कोई दुष्प्रभाव नहीं
डॉ. ललिता कुशवाह ने बताया कि यह ऑइंटमेंट फाइटोकेमिकल आधारित है, यानी इसमें पौधों में पाए जाने वाले प्राकृतिक रसायनों का इस्तेमाल किया गया है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं और अब तक किसी भी मरीज में एलर्जी या रिएक्शन की शिकायत सामने नहीं आई है। डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर लेवल अधिक होने के कारण घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई बार छोटे घाव भी समय के साथ गंभीर रूप ले लेते हैं और गैंग्रीन में बदल जाते हैं। ऐसे मामलों में अंग काटने तक की नौबत आ जाती है।
12 दिनों में भर गया घाव
ऑइंटमेंट तैयार होने के बाद पहले इसका एनिमल ट्रायल किया गया। सामान्य जानवरों के बाद डायबिटिक कंडीशन वाले एनिमल्स पर इसे टेस्ट किया गया। करीब 400 एमएम स्क्वायर का घाव महज 12 दिनों में पूरी तरह हील हो गया। साथ ही इंफ्लेमेशन कम हुआ, स्किन और सेल रीजेनरेशन तेज हुआ और कोलेजन फॉर्मेशन बेहतर पाया गया।
मरीजों पर सफल ट्रायल
इसके बाद गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में 200 से अधिक डायबिटिक मरीजों पर ह्यूमन ट्रायल किया गया। इस दौरान नॉन-डायबिटिक और डायबिटिक दोनों तरह के घावों पर ऑइंटमेंट का इस्तेमाल किया गया, जिसमें बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए।
30 से 90 दिनों में पूरी तरह ठीक हुए घाव : डायबिटिक घावों को तीन कैटेगरी स्मॉल, मीडियम और मॉडरेट में बांटा गया।
स्मॉल वाउंड: लगभग 30 दिनों में ठीक
मीडियम वाउंड: 60 से 70 दिनों में ठीक
मॉडरेट वाउंड: 80 से 90 दिनों में पूरी तरह ठीक
पेटेंट के लिए आवेदन
डॉ. ललिता ने अपने हर्बल ऑइंटमेंट के लिए पेटेंट आवेदन कर दिया है। पेटेंट प्रक्रिया पूरी होते ही इसे बाजार में लॉन्च किया जाएगा। डॉ. ललिता का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में काम के दौरान उन्होंने कई ऐसे मरीज देखे, जिनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते थे। इसी वजह से उन्होंने तय किया कि यह दवा बेहद कम कीमत में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
सन्दर्भ स्रोत एवं छाया : ईटीवी भारत



Comments
Leave A reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *