छाया : भोपाल एम्स के ट्विटर अकाउंट से
एम्स भोपाल लगातार चिकित्सा सेवाओं और शोध के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। इसी क्रम में चिकित्सा ऑन्कोलॉजी एवं हीमैटोलॉजी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. आकांक्षा चौधरी ने मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “11th Annual End Review in Breast Cancer” में भाग लिया। डॉ. चौधरी को इस सम्मेलन में विशेषज्ञ चिकित्सा ऑन्कोलॉजिस्ट एवं फैकल्टी स्पीकर के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) सत्र में ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित तीन महत्वपूर्ण शोध अध्ययनों को प्रस्तुत किया।
ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पर शोध
डॉ. आकांक्षा ने अपने व्याख्यान में प्रारंभिक अवस्था में जीनोमिक टेस्टिंग द्वारा व्यक्तिगत उपचार, मानक उपचार के बाद दवाओं की भूमिका और स्तन कैंसर के क्लीनिकल ट्रायल्स में एंड-पॉइंट्स के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। यह सम्मेलन महिला कैंसर पहल द्वारा टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई में आयोजित किया गया, जिसे नाग फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त था। सम्मेलन का नेतृत्व डॉ. शोना नाग और डॉ. सुदीप गुप्ता ने किया।
विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञों की मौजूदगी
सम्मेलन में विश्वभर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. एलिस्टेयर रिंग (रॉयल मार्सडन अस्पताल, लंदन), डॉ. माटेओ लैंबर्टिनी (यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा, इटली), डॉ. सिबिले लोइब्ल (यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रैंकफर्ट) प्रमुख रहे। डॉ. आकांक्षा के व्याख्यान को डॉ. एस.एच. अडवाणी, डॉ. सुदीप गुप्ता और डॉ. शोना नाग जैसे वरिष्ठ विशेषज्ञों ने सराहा।
प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी पर जोर
डॉ. आकांक्षा ने ‘प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी’ की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अब इलाज हर मरीज के कैंसर की जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर तय किया जाना चाहिए। इससे इलाज अधिक प्रभावी होता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं। डॉ. चौधरी ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि भारत में भी जीनोमिक आधारित परीक्षणों का विकास हो, ताकि हर वर्ग के मरीज को आधुनिक और व्यक्तिगत उपचार मिल सके।
सन्दर्भ स्रोत : नवदुनिया
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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