राज्‍य स्‍तरीय खेल पुरस्कारों की घोषणा: 7 महिला खिलाड़ियों

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राज्‍य स्‍तरीय खेल पुरस्कारों की घोषणा: 7 महिला खिलाड़ियों
को एकलव्य और चार को मिलेगा विक्रम अवॉर्ड

• 23 खिलाड़ियों में 11 महिला खिलाड़ी और 1 महिला कोच शामिल

• भोपाल की सौम्‍या तिवारी को एकलव्‍य और ग्वालियर की नीरज राणा को मिलेगा विक्रम पुरस्‍कार

भोपाल। मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग ने 2022 के लिए ‘एकलव्य', 'विक्रम' और 'विश्वामित्र' पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 23 खिलाड़ियों के नाम घोषित किए गए हैं। ख़ास बात यह है कि इनमें से 7 महिला खिलाड़ियों को एकलव्य, ४ को विक्रम पुरस्कार तथा एक महिला कोच को विश्वामित्र अवार्ड दिया जाएगा। इन खिलाड़ियों को एक से दो लाख रुपये तक की इनाम राशि के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।

• विक्रम पुरस्कार

विक्रम पुरस्कार के लिए ग्वालियर की नीरज राणा (हॉकी), अशोकनगर की भू रक्षा दुबे (वूशु), रायसेन की प्रगति दुबे (शूटिंग) तथा सीहोर की नीतू वर्मा (क्याकिंग-केनोइंग) के नामों की घोषणा हुई है।

• एकलव्य पुरस्कार

भोपाल की खुशबू (हॉकी), आशी चौकसे (शूटिंग) और सौम्या तिवारी (क्रिकेट), सिमरिया-पन्ना की प्रज्ञा सिंह (फेंसिंग), राजगढ़ की आस्था दांगी (क्याकिंग-केनोइंग), नरसिंहगढ़  की रितिका दांगी (सेलिंग) और इंदौर की पलक शर्मा (तैराकी) का एकलव्य पुरस्कार के लिए चयन किया गया है।

• विश्वामित्र पुरस्कार

 श्रीमती रश्मि मालवीय 
 

• नीरज राणा

ग्वालियर की हॉकी खिलाड़ी नीरज राणा को मप्र का सर्वोच्च विक्रम अवार्ड मिलेगा। नीरज राणा बताती हैं उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मप्र का सर्वोच्च विक्रम अवार्ड मिलेगा। जब हॉकी पकड़ी तो लोगों ने कहा था ये लड़कियों का खेल नहीं है, लेकिन आज उनको गर्व है कि बेटी ने नाम रोशन कर दिया है। राई जैसे छोटे से गांव से निकलकर नीरज का परिवार ग्वालियर में आकर बस गया। पढ़ाई के साथ खेलने की इच्छा हुई तो दर्पण खेल मैदान पर आयोजित ग्रीष्मकालीन शिविर में प्रैटिक्स शुरू की और यहां से सफर शुरू हुआ। करीब दो साल यहां सीखने के बाद मप्र महिला हॉकी अकादमी की ट्रायल दी और पहली बार में ही चयन हो गया।  हॉकी की बदौलत 2022 में रेलवे में नौकरी मिली, तो ऐसा लगा जिस लक्ष्य को लेकर हॉकी को चुना था वह पूरा हो गया।

• भू रक्षा दुबे

अशोकनगर निवासी भू रक्षा कमलेश आनंद मोहन दुबे की बेटी हैं। वे वर्ष 2009 से लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतते आ रही हैं। भू रक्षा के खाते में 30 से अधिक राष्ट्रीय पदक हो चुके हैं। इन्हें एकलव्य अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

• प्रगति दुबे

बेगमगंज तहसील के एक छोटे से गांव ध्वाज में रहने वाले भोलाशंकर दुबे की पुत्री प्रगति दुबे अपनी दीदी कल्याणी द्विवेदी से प्रेरणा लेकर शॉट गन की तैयारी के लिए भोपाल आ गई। प्रगति ने भोपाल के एक निजी स्कूल में दाखिला लिया और निशाने बाजी की प्रेक्टिस की। प्रगति के पिता गांव में कृषि कार्य करते हैं। सबसे पहले प्रगति ने पटियाला में नेशनल खेला जिसमें प्रगति ने सिल्वर जीता था। इसके बाद नेशनल गेम्स में अनेक पुरस्कार हासिल किये। प्रगति फिनलैंड, जर्मनी,इटली में भारत का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं।

• खुशबू खान

गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली खुशबू ने जूनियर इंडिया टीम की ओर से खेलते हुए प्रदेश का नाम रोशन किया। वर्तमान में खुशबू हॉकी इंडिया के बैंगलुरु में आयोजित हो रहे जूनियर नेशनल कोचिंग कैंप में शामिल है। खुशबू ने छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। बचपन से हॉकी के प्रति रुझान था और उसने हॉकी में छोटी में बड़ा मुकाम हासिल किया। खुशबू ने जूनियर इंडिया टीम में भारत का प्रतिनिधित्व किया उसके आधार पर उसको प्रदेश के एकलव्य अवार्ड से नवाजा जाएगा। भोपाल की रहने वाली खुशबू के पिता प्लंबर का काम करते हैं।

• प्रज्ञा सिंह

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रहने वाली एक किसान की बेटी तलवारबाजी में देश का नाम रोशन कर रही टैलेंट सर्च से 2016 में अकादमी में प्रवेश लेनी वाली प्रज्ञा ने अभी तक सात नेशनल खेले हैं और पांच पदक जीते।  प्रज्ञा, पन्ना जिले के सिमरिया तहसील में रहने वाले किसान नरेंद्र सिंह चौहान की बेटी है। पिता अब भी खेतों में हल चलाते हैं, लेकिन बेटी की तलवारबाजी की धमक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देने लगी है। प्रज्ञा की यह उपलब्धि बेहद खास है क्योंकि उसने पन्ना जैसी छोटी जगह से शुरुआत कर यह मुकाम हासिल किया है। इतना ही नहीं, तलवारबाजी में प्रज्ञा की खास रुचि नहीं थी। पिता के कहने पर उसने जब एक बार तलवार थामी तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रज्ञा इससे संतुष्ट नहीं हैं। वे भविष्य में देश के लिए तलवारबाजी में गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं।

• आशी चौकसे 

भोपाल की युवा प्रतिभाशाली निशानेबाज आशी चौकसे ने 6 साल पहले तक बंदूक को छूआ भी नहीं था। उनके घर में कोई बंदूक नहीं थी। भेल के कार्मल कान्वेंट से पासआउट आशी ने स्कूल में एनसीसी के दौरान 2017 में पहली बार बंदूक पकड़ी थी। एनसीसी में सही निशाना लगाने के कारण इसमें इंट्रेस्ट आया। उसी वर्ष मप्र अकादमी के ट्रायल हुए। उसमें हाथ आजमाया और चुन ली गईं। अकादमी में आने के बाद फिर मुड़कर नहीं देखा। इन पांच साल में उन्होंने करीब 14 नेशनल गोल्ड अपने नाम किए हैं। जबकि अजरबैजान वर्ल्डकप में उन्होनें 50 मीटर थ्री  प्रोजीशन में गोल्ड जीतकर इंटरनेशनल लेवल पर भी अपनी धाक जमा ली है। इंटरनेशनल लेवल पर उनके तीन ब्रोंज़े मेडल भी हैं। अपने घर में वह अकेली प्लेयर है। घर में कोई भी स्पोर्ट्स से जुड़ा नहीं है। लेकिन आशी का अब सब कुछ शूटिंग ही है।

• सौम्या तिवारी

अपने पिता को क्रिकेट खेलते देख क्रिकेटर बनने की जिद और जुनून के चलते आज मप्र की होनहार क्रिकेटर सौम्या तिवारी भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम की उपकप्तान हैं। सौम्या शुरुआत में घर में ही मोगरी से क्रिकेट खेलती थी। बाद में अपनी बहन और बच्चों के साथ मोहल्ले के मैदान में ही खेलना शुरू किया। भोपाल के अरेरा क्रिकेट अकादमी अरेरा क्रिकेट क्लब में कोच से मिले प्रशिक्षण और अपनी मेहनत से कम समय में ही सौम्या ने आज वो मुकाम हासिल कर लिया है, जहाँ पहुंचना हर क्रिकेटर का सपना होता है। एनसीए के विभिन्न टूर्नामेंट में सौम्या ने अपने खेल से सभी को इतना प्रभावित कि श्रीलंका और वेस्टइंडीज के अलावा भारत ए और भारत बी के बीच खेले गए चतुष्कोणीय श्रृंखला  में उन्हें भारत ‘ए’ का उपकप्‍तान बनाया गया। सौम्या भोपाल की पहली महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी है।

• रितिका दांगी

रितिका दांगी नरसिंहगढ़ के छोटे से गांव ताजपुरा की रहने वाली हैं। उनके पिता जगदीश दांगी एक छोटे किसान हैं। रितिका की चचेरी बहनें रामकन्या दांगी और रुकमणी दांगी भी इसी गांव से निकलकर वाटर स्पोर्ट्स में इंटरनेशनल तक पहुंची हैं। तीनों बहनों ने वाटर स्पोर्ट्स में एक साथ करियर शुरू किया था। रामकन्या कयाकिंग में, रुकमणी रोइंग में चली गईं  तो रितिका सेलिंग में। गाँव में किसी ने उनके पिता जगदीश दांगी को बेटी के लिए  वाटर स्पोर्ट्स में करियर चुनने की सलाह दी। उसी सलाह को मानते हुए वे अपनी बेटी रितिका को भोपाल लेकर आए. मप्र अकादमी के पहले ही ट्रायल में वह चुन ली गईं। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

• पलक शर्मा

इंदौर की गोताखोर पलक शर्मा को एकलव्य अवॉर्ड मिला है। पलक के नाम  हाल ही में जून में हुई सीनियर नेशनल गोताखोरी स्पर्धा में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड है। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार अवॉर्ड से सम्मानित होने के अलावा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं। पलक ने एशियन चैम्पियनशिप में 1 स्वर्ण और 2 पदक जीते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 12 स्वर्ण, 5 रजत और 2 कांस्य पदक जीते।

• रश्मि मालवीय

वर्ष 2022 में विश्वामित्र पुरस्कार के लिए भोपाल की बैंडमिंटन प्रशिक्षक श्रीमती रश्मि मालवीय का चयन किया गया है।

संदर्भ स्रोत: विभिन्न समाचार पत्र 

संपादन: मीडियाटिक डेस्क 

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