छाया: पीपुल्स
• ड्रिबलिंग और शूटिंग में है माहिर
भोपाल। बर्लिन में आयोजित स्पेशल ओलंपिक गेम्स में भोपाल के खजुरीकलां स्थित एसओएस बालग्राम की लक्ष्मी ने रजत पदक अपने नाम किया है। लक्ष्मी ने भारतीय बास्केटबॉल टीम की खिलाड़ी के रूप में यह उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 21 वर्षीय लक्ष्मी बधिर होने के साथ-साथ मानसिक रूप से कमजोर और सेरेब्रल पाल्सी की शिकार भी है। इन तमाम शारीरिक कमजोरियों के बाद भी अपने हौसले और जुनून के बल पर लक्ष्मी ने बर्लिन में आयोजित स्पेशल ओलिम्पिक्स वर्ल्ड गेम्स में कमाल कर दिखाया और भारतीय टीम को बास्केटबॉल में रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। स्पेशल ओलिम्पिक्स में भाग लेने से पहले लक्ष्मी 2022 में पांडिचेरी में आयोजित राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उसी में शानदार प्रदर्शन के कारण उसका चयन भारतीय दल में हुआ था।
एसओएस बालग्राम की प्रमुख सुमांता कर बताती हैं कि लक्ष्मी की उपलब्धि अद्भुत है। लक्ष्मी की उपलब्धि पर संस्थान से जुड़े हर व्यक्ति को गर्व है। लक्ष्मी की जीत ने हमारे संगठन द्वारा बच्चों की परवरिश के लिए तैयार किये जाने वाले सकारात्मक माहौल की अहमियत को भी रेखांकित किया है। एसओएस बालग्राम लक्ष्मी की देखभाल तब से कर रहा है, जब वह महज पांच साल की थी। शुरुआती दिनों में लक्ष्मी ख़ुद को ठीक से अभिव्यक्त भी नहीं कर पाती थी और उसे अपनी जरूरतों के बारे में बताने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
• फ्लोरबॉल से की थी करियर की शुरुआत
लक्ष्मी की कोच और राष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रतिभा श्रीवास्तव बताती हैं कि लक्ष्मी ने बास्केटबॉल से पहले फ्लोरबॉल से शुरुआत की थी। लेकिन बास्केटबॉल के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें जल्दी बास्केटबॉल खिलाड़ी बना दिया। फ्लोरबॉल में कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद लक्ष्मी के मन में बास्केटबॉल के प्रति जबर्दस्त आकर्षण था। घंटों प्रशिक्षण के चलते वह जल्द ही ड्रिबलिंग और शूटिंग में माहिर हो गई। वे बताती हैं कि लक्ष्मी में सीखने की अद्भुत क्षमता है। वह एक बेहतरीन किस्म की एथलीट है क्योंकि उसमें सीखने और कामयाब होने की ग़ज़ब की ललक है। सफलता पाने के लिए उसकी जद्दोजहद प्रेरणादायक है।
संदर्भ स्रोत: पीपुल्स
संपादन: मीडियाटिक डेस्क



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