जूनियर महिला हॉकी वर्ल्ड कप : दतिया की ज्योति

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जूनियर महिला हॉकी वर्ल्ड कप : दतिया की ज्योति
की कप्तानी में मिली पहली जीत

छाया : हॉकी इंडिया डॉट ओआरजी

'अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती' इस कहावत को सच कर दिखाया है मध्यप्रदेश के दतिया की ज्योति सिंह ने। 10 साल पहले हॉकी स्टिक थामने वाली ज्योति भारतीय महिला जूनियर टीम की कप्तान बनकर वर्ल्ड कप खेलने गई हैं। चिली के सेंटियागो में 25 नम्वबर से 13 दिसंबर तक आयोजित इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने अपने पहले मुकाबले में ही शानदार प्रदर्शन करते नामीबिया को 13-0 से करारी शिकस्त दी।  ज्योति सिंह के अलावा टीम में ग्वालियर स्थित राज्य महिला हाकी एकेडमी की शिलेमा चानू भी शामिल हैं, जबकि इंदौर की प्रियंका यादव को वैकल्पिक खिलाड़ी के रूप में स्थान मिला है। 

ज्योति का हॉकी से जुड़ाव तब हुआ था, जब वह केवल 12 साल की थीं। उनकी बुआ की बेटी अनुजा सिंह ग्वालियर की मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी में हॉकी खेलती थीं। एक दिन जब ज्योति ने अनुजा को खेलते देखा, तो उसने निर्णय लिया कि वह भी हॉकी खेलेगी। इसके बाद, अनुजा ने कोच परमजीत सिंह से बात की और 2015 में ज्योति को पहली बार हॉकी ट्रायल दिलवाया। उसी साल, उनका चयन अकादमी में हो गया और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम 

कठिन अभ्यास, अनुशासन और फिटनेस पर निरंतर काम ने ज्योति को एक मजबूत खिलाड़ी बनाया। उन्होंने जूनियर और सीनियर दोनों स्तरों पर शानदार प्रदर्शन किया है। 2024 में ज्योति की कप्तानी में भारत ने जूनियर एशिया कप में स्वर्ण पदक जीता था। 2023 के जूनियर वर्ल्ड कप में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा थीं।

सीनियर टीम में भी डेब्यू 

इस साल ज्योति ने भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम में भी डेब्यू किया। उन्होंने प्रो लीग के लिए यूरोप में 12 मैच खेले। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, जो यह साबित करता है कि उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता ने उन्हें भारतीय सीनियर टीम तक पहुँचाया। 

परिवार का समर्थन और प्रेरणा
ज्योति के पिता धीरज सिंह परिहार स्वयं एक पूर्व एथलीट हैं और रेलवे में खेल कोटे से नौकरी करते हैं। उनकी बुआ भी एथलीट रही हैं, और उनकी बुआ की बेटी अनुजा सिंह भी सीनियर भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इस खेल माहौल में पली-बढ़ी ज्योति को हमेशा प्रेरणा मिलती रही है, और यह उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाता है। 

अगला सपना: ओलिंपिक में पदक 

ज्योति का अगला सपना भारतीय सीनियर टीम के साथ ओलिंपिक में पदक जीतने का है। वह सिर्फ मैदान में ही नहीं, पढ़ाई में भी उत्कृष्ट रही हैं और ग्वालियर की एक निजी विश्वविद्यालय से फिजिकल एजुकेशन में ग्रेजुएशन की है। खाली समय में वह महान हस्तियों की जीवनी पढ़ने का शौक रखती हैं और स्वामी विवेकानंद, भगत सिंह, महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसी हस्तियों से प्रेरित रहती हैं।

सन्दर्भ स्रोत : नईदुनिया

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क 

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