नरसिंहपुर की दानिश अली ने जेएनयू

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नरसिंहपुर की दानिश अली ने जेएनयू
में रचा इतिहास, बनीं जॉइंट सेक्रेटरी

छाया : द डेली गार्जियन

नरसिंहपुर जिले के बंदरबारू गांव की दानिश अली जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ चुनाव में जॉइंट सेक्रेटरी चुनी गई हैं। AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) प्रत्याशी के रूप में उनकी यह जीत ऐतिहासिक मानी जा रही है। 

दानिश अली की प्रारंभिक शिक्षा गाडरवारा के क्राइस्ट चर्च कॉन्वेंट स्कूल से हुई। उन्होंने न्यू एज पब्लिक स्कूल से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री तेग़ बहादुर खालसा कॉलेज से इतिहास विषय के साथ बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। दानिश हिस्टोरिकल नैरेटिव्स पर रिसर्च कर रही हैं, पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट छात्र राजनीति में सक्रिय दानिश अली ने सामाजिक न्याय, शिक्षा के अधिकार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज़ उठाई है।  AISA के बैनर तले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के अधिकारों और समावेशी वातावरण के लिए लगातार काम किया।

उनकी जीत की खबर मिलते ही बंदरबारू और आसपास के इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने मिठाइयाँ बांटकर जश्न मनाया। अपनी सफलता पर दानिश अली ने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि हर उस छात्र की है जो समानता और न्याय के लिए आवाज़ उठाता है। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि गाँव की हर बेटी आगे बढ़े, अपने सपनों को साकार करे और गरीब, वंचित व पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग दे।

बचपन से ही पढ़ाई होशियार रही 

दानिश बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार रही है और हमेशा उसने हर क्लास में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इतना ही नहीं, उन्होंने खेलों में भी नाम कमाया.थ्रोबॉल और क्रिकेट में वह स्टेट लेवल की खिलाड़ी रहीं। उनके पिता सैयद अली रिटायर्ड शिक्षक तथा  मां चीचली कन्या शाला में प्रिंसिपल है। 

229 वोटों से जीती चुनाव  

दानिश वामपंथी राजनीति की सबसे उग्र शाखा का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने 229 मतों के अंतर से चुनाव में विजय प्राप्त की। वे सामंती ढाँचों और जाति-व्यवस्था के विरुद्ध खुलकर आवाज़ उठाती हैं। सामाजिक और संस्थागत भेदभाव के विरोध में वे प्रतिरोध का प्रतीक बन चुकी हैं। उनका चुनाव अभियान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को स्वतंत्रता, समानता और असहमति के गढ़ के रूप में देखती हैं। इस चुनाव में भी उनका संदेश स्पष्ट था -“बाधाएँ तोड़ो, सबको समानता दो।”
विद्यार्थियों ने उनके विचारों को सराहा और उनके समर्थन में मतदान किया, जिसके परिणामस्वरूप वे 229 मतों से विजयी रहीं। 

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट 

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