भाविनी  झा : मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी

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भाविनी  झा : मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी
छोड़ मछली पालन में बनाई पहचान

जबलपुर की भाविनी झा ने यह साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर बनने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, हिम्मत और जोखिम उठाने का जज्बा भी जरूरी होता है। IT में इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने हैदराबाद की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की, लेकिन कॉर्पोरेट जीवन उन्हें लंबे समय तक रास नहीं आया। 

पति कौस्तुभ के साथ उन्होंने जबलपुर लौटकर कोचिंग सेंटर शुरू किया, जो अच्छा चल रहा था। इसी बीच कोरोना महामारी ने सब कुछ बदल दिया। कोचिंग बंद करनी पड़ी और यहीं से शुरू हुआ जिंदगी का नया अध्याय।

4.5 एकड़ जमीन पर लिया बड़ा जोखिम

भाविनी  ने तय किया कि अब वह खुद का बिजनेस करेंगी। फूड चैन से जुड़े विकल्पों पर विचार करने के बाद उन्होंने मछली पालन जैसा कठिन और जोखिम भरा क्षेत्र चुना। बिना किसी पारिवारिक अनुभव के उन्होंने हिनोतिया गांव में 4.5 एकड़ जमीन खरीदी। शुरुआत आसान नहीं थी। तालाब खुदवाने के बाद पानी जमीन में समा गया क्योंकि मिट्टी मुरम और रेतीली थी। लाखों की पूंजी दांव पर थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

ट्रेनिंग से बदली दिशा

उन्होंने भुवनेश्वर और मुंबई के मत्स्य संस्थानों से प्रशिक्षण लिया और मत्स्य विभाग से मार्गदर्शन व अनुदान प्राप्त किया। इसके बाद HDPE लाइनर तकनीक अपनाई, जिससे पानी का रिसाव रुका। उन्होंने पेंगासस (Pangasius) मछली का पालन शुरू किया और वैज्ञानिक तरीके से फीडिंग व पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया।

आज 6 तालाब, 20–30 टन सालाना उत्पादन

आज भाविनी के पास 6 तालाब हैं और वे हर साल 20 से 30 टन मछली का उत्पादन कर रही हैं। थोक बाजार में उन्हें लगभग ₹120 प्रति किलो तक दाम मिलता है। उनके इस उद्यम से एक दर्जन से अधिक परिवारों को रोजगार मिला है।

सन्दर्भ स्रोत/छाया : ईटीवी भारत

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क

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