नई दिल्ली। सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संस्थागत सुधारों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के कॉलेजियम को योग्य महिला वकीलों को जज नियु्क्त करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसे अपवाद नहीं बल्कि सामान्य प्रक्रिया बनाना चाहिए।
इंडियन वीमेन इन लॉ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि महिलाएं किसी प्रकार की रियायत नहीं चाहतीं, बल्कि उन्हें न्यायपू्र्ण और उचित प्रतिनिधित्व चाहिए, जो लंबे समय से लंबित है। सीजेआई ने हाईकोर्ट कॉलेजियम से अपील की कि वे अपने विचार क्षेत्र का विस्तार करें और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही अपने-अपने राज्यों की महिला वकीलों को भी जज नियुक्ति के लिए शामिल करें। उन्होंने कहा कि इस तरह के सुधार किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बनने चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, हम सभी को यह समझना होगा कि इस प्रकार का सुधार कोई एक घटना नहीं है यह एक निरंतर प्रक्रिया है। संस्थागत निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत कार्यकाल और व्यक्तित्व से परे दृढ़ता की आवश्यकता होती है। उन्होंने आगे कहा, हो सकता है कि यह मेरे कार्यकाल में या मेरे साथी न्यायाधीशों के कार्यकाल में पूर्ण रूप से साकार न हो पाए। लेकिन, इससे हमारी प्रतिबद्धता की गहराई का निर्धारण नहीं होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि जब ऐसा होगा, तो प्रतिनिधित्व अब व्यक्तित्वों या संकल्प के क्षणों पर निर्भर नहीं करेगा। यह संस्था की संरचना में ही निहित होगा और अंततः इसी तरह स्थायी परिवर्तन होता है।उन्होंने बताया कि फिलहाल कई हाईकोर्ट में महिलाएं मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा दे रही हैं। पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में 18 महिला जज कार्यरत हैं वहीं मद्रास हाई कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट में भी करीब एक दर्जन महिला जज हैं।
जिला न्यायालय में महिलाओं की संख्या 36.3 प्रतिशत
सीजेआई ने कहा कि जिला न्यायपालिका में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 36.3 प्रतिशत है, जो आने वाले समय में उच्च न्यायपालिका में उनकी बढ़ती उपस्थिति का संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की मौजूदगी न्यायपालिका को समाज की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।



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