• चाय पीओ, कप खाओ, पर्यावरण बचाओ
भोपाल। खानपान के कारोबार जगत पर अब तक अधिकांशत: पुरुषों का वर्चस्व रहा है, लेकिन भोपाल की युवतियां अब इस दृश्य को बदल रही है। ये महिला उद्यमी पुराने फूड बिजनेस को नवाचार के साथ नए स्वरूप और नए अंदाज में कर रही हैं, जो लोगों को लुभा भी रहा है। शाहपुरा झील के पास एक युवती जहां अनोखे डिजाइन के ट्रक पर साउथ इंडियन फूड की दुकान चला रही है, तो वहीं बी-टेक चायवाली ऐसे कप में चाय परोसती है, जो खाने योग्य भी है।
• कैफे ड्रम्सट्रिक्स: जैविक अनाज से बनते हैं दक्षिण भारतीय व्यंजन
शाहपुरा लेक के पास इसी साल जनवरी में साउथ इंडियन खाने की दुकान शुरू करने वाली पिंकी मंडल की पढ़ाई बेंगलोर में हुई है। वीआईटी से मास्टर इन बायोमेडिकल जेनेटिक की पढ़ाई करने के बाद नौकरी के सिलसिले में 2021 में भोपाल आ गई। पिंकी को शुरू से ही नये-नये व्यंजन बनाना और लोगों को खिलाना पसंद है। वे कहती हैं एक तरह से कुकिंग मेरा पैशन है। पिरामल फाउंडेशन के साथ काम के दौरान कुछ प्रोजेक्ट्स में जैविक खेती करने वाले किसानों के साथ काम करने का अवसर मिला। तब जैविक खेती के बारे में गहराई से जाना-समझा। इन्हीं जैविक उत्पादों के साथ फूड बिजनेस करने का विचार आया।
वे बताती हैं शुरुआत में अनंत महोत्सव में स्टाल लगाया, जहां अच्छा प्रतिसाद मिलने के बाद अन्य जगह पर भी स्टाल लगाये। स्ट्रीट मार्केट और लोगों की पसंद समझने कुछ दिन कैनोपी पर काम का अनुभव लिया और कुछ दिनों पहले ही इसे मिनी ट्रक में तब्दील किया गया है। दुकान सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक खुलती है। कैफे ड्रमस्टिक्स में मल्टीग्रेन डोसा, मूंगदाल डोसा और रागी डोसा खास है। इसके अलावा इडली बड़ा, सांभर, उतप्पम भी स्वादिष्ट और पौष्टिक मिलता है। जैविक उत्पादों से बने ये फूड्स प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। साउथ का खानपान मुझे बहुत पसंद है। इसी कारण यह व्यवसाय शुरू किया। पहले शाप दो-तीन घंटे खोलती थी, बाकी समय में नौकरी करती थीं, अब समय बढ़ा दिया है। ड्राइवर समेत तीन लोग इसमें काम करते हैं।
• बीटेक चायवाली: यहाँ मिलती है छह प्रकार की चाय
आमतौर पर लोग जिस कप, कुल्हड़ या डिस्पोजल गिलास में चाय पीते हैं, उसे वहीं छोड़ कर चले आते हैं, लेकिन भोपाल में आप चाय पीने के बाद उस कप को फेंकने की बजाए खा भी सकते हैं। जी हाँ, बीटेक चायवाली भोपाल में पहला चाय आधारित स्टार्टअप है, जिसमें खाने योग्य कप की अवधारणा भी है। यहाँ एडीवल (बिस्किट जैसा कप) कप में चाय दी जाती है, जो खाने योग्य है। यह न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि प्लास्टिक के विकल्प के रूप में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता में भी सहायक है। कैफे में 6 से अधिक प्रकार की चाय मिलती है।
बीटेक चायवाली की स्थापना करने वाली अंकिता उपाध्याय ने वर्ष 2018 में उत्तरप्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से बीटेक करने के बाद नोएडा में एक निजी कंपनी एचसीएल में नौकरी शुरू की, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही कुछ अलग हटकर करने की सोच के चलते नौकरी में उनका मन नहीं लगा और वर्ष 2022 में नौकरी छोड़ दी। वे बताती हैं उन्हें व्यवसाय भी कुछ अलग हटकर करना था। एमबीए चाय वाला से प्रेरणा लेकर उन्होंने दिसंबर 2023 में बी-टेक चायवाली स्टार्टअप की शुरुआत कर स्वरोजगार की ओर रुख किया। साथ ही उन्होंने डिस्पोजल गिलास की बजाय कुछ ऐसे कप लेने पर विचार किया जिसमें चाय पीने के बाद लोग उसे खा भी सकें। पहली दुकान उन्होंने दस नंबर में खोली। इसके बाद अब शाहपुरा में तालाब के किनारे दुकान चलाती हैं। उनकी दुकान में घोड़ाताल, उत्तराखंड की ग्रीन और ब्लैक टी के साथ छह प्रकार की चाय और स्प्राउट (अंकुरित) जैसे पौष्टिक नाश्ते उपलब्ध हैं। खाने वाले कप जो मिलेट्स से बनते हैं, उसे नागपुर महाराष्ट्र से मंगवाती हैं। अंकुरित खाद्य पदार्थ पर्यावरण अनुकूल बायोडिग्रेडेबल कप में दिए जाते हैं। अंकिता ने बताया कि भविष्य में व्यवसाय का विस्तार करते हुए विभिन्न प्रकार की चाय के अलावा स्वस्थ अंकुरित आधारित विभिन्न प्रकार के सलाद उपलब्ध कराने की भी योजना है।



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