एम्स भोपाल की डॉ. आकांक्षा चौधरी ने हार्वर्ड कैंसर ट्रेनिंग

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एम्स भोपाल की डॉ. आकांक्षा चौधरी ने हार्वर्ड कैंसर ट्रेनिंग
में दिखाई कैंसर उपचार की नई राह, शोध प्रस्तुत

छाया : एम्स भोपाल के इंस्टाग्राम पेज से

भोपाल। चिकित्सा जगत में महिलाएं अब नेतृत्व की भूमिका में हैं और अपनी विशेषज्ञता से वैश्विक मंच पर देश का परचम लहरा रही हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल की डॉ. आकांक्षा चौधरी ने न केवल अपनी मेहनत, बल्कि ज्ञान से देश की लाखों महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की है। 

मेडिकल आन्कोलाजी एवं हीमैटोलाजी विभाग की युवा फैकल्टी की डॉ. चौधरी ने हाल ही में मुंबई में आयोजित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल आन्कोलाजी ट्रेनिंग प्रोग्राम में एम्स भोपाल का प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्होंने कैंसर के उपचार में महिलाओं और पुरुषों के लिए समान रूप से लागू होने वाली सबसे नई और प्रभावी तकनीकों को समझा और साझा किया।

महिलाओं से जुड़े कैंसर शोध में अग्रणी 

डॉ. आकांक्षा चौधरी का शोध कार्य बताता है कि वह महिला स्वास्थ्य को लेकर कितनी संवेदनशील हैं। उनके कई प्रमुख शोध-पत्र विशेष रूप से स्तन कैंसर पर केंद्रित है, जो महिलाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पर शोध में उग्र माने जाने वाले स्तन कैंसर में पीडी-एला प्रोटीन की अभिव्यक्ति पर अध्ययन किया है। यह शोध इम्यूनोथेरेपी के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे महिलाओं को उनके कैंसर के प्रकार के आधार पर सबसे सटीक इलाज मिल सके।

इलाज पर वजन का असर बताया 

डॉ. चौधरी ने यह भी अध्ययन किया कि मोटापा या कम वजन (बॉडी मास इंडेक्स) नियोएडजुवेट कीमोथेरेपी (सर्जरी से पहले कीमो) के बाद स्तन कैंसर के मरीजों की प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करता है। यह महत्वपूर्ण जानकारी चिकित्सकों को प्रत्येक महिला रोगी के लिए बेहतर इलाज योजना बनाने में मदद करेगी। उन्होंने असामान्य स्तन ट्यूमर का प्रबंधन पर शोध किया। उनके केस रिपोर्ट में स्तन के फायलाइड्स ट्यूमर के मांसपेशियों तक फैलाव जैसे अत्यंत दुर्लभ मामले भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने हेड-एंड-नेक कैंसर में तेज रेडिएशन तकनीक ('क्वाड शाट') पर भी काम किया है, जिससे मरीजों को कम समय में प्रभावी इलाज मिल सके।

शीर्ष विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श

इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. आकांक्षा ने बोस्टन, यूएसए के विश्व विख्यात डाना फार्बर कैसर इंस्टीट्यूट और बेथ इस्राइल डीकानेस मेडिकल सेंटर के शीर्ष विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। साथ ही मुंबई के टाटा मेमोरियल हास्पिटल सहित देशभर के प्रमुख कैसर विशेषज्ञ भी इसमें शामिल थे। चर्चा का मुख्य केंद फेफड़ों के कैंसर और विशेष रूप से स्तन कैंसर जैसे रोग रहे जो भारत में महिलाओं में सबसे आम हैं। 

डॉ. चौधरी और अन्य विशेषज्ञों ने इम्यूनोथेरेपी (जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैसर से लड़ने के लिए तैयार करती है) और टारगेटेड थेरेपी (जो केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है। जैसी क्रांतिकारी उपचार पद्धतियों पर नवीन शोधों पर चर्चा की। उनका यह अनुभव सीधे तौर पर एम्स भोपाल के मरीजों को लाभ पहुंचाएगा, जहां अब मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों की महिलाओं को अत्याधुनिक और व्यक्त्तिगत रूप से अनुकूलित इलाज मिल सकेगा।

सन्दर्भ स्रोत : नवदुनिया

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