ओरल कैंसर पर शोध के लिए

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ओरल कैंसर पर शोध के लिए
डॉ. आस्था को 19 करोड़ की ग्रांट

छाया : College of DentistryUNIVERSITY of FLORIDA

ओरल कैंसर की समस्या से केवल भारत ही नहीं जूझ रहा है, बल्कि दुनियाभर में यह विभिन्न कारणों से चिकित्सा पेशेवरों के बीच चिंता का विषय है। हमारे देश में हर साल 1.35 लाख से अधिक नए ओरल कैंसर के मामले सामने आते हैं। यदि कैंसर का पता शुरुआती चरण में ही चल जाए, तो ओरल कैंसर के कारण होने वाली मौतों पर 70 प्रतिशत तक काबू पाया जा सकता है। ओरल कैंसर के इस शुरुआती पहचान पर शोध कर रही हैं भोपाल की डेंटल पेशेवर डॉ. आस्था सिंघल। वे अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। 

डॉ. आस्था सिंघल को उनके शोध के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ -एनआईएच) के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल एंड क्रेनियोफेशियल रिसर्च से 2.2 मिलियन डॉलर यानी करीब 18.7 करोड़ रुपए की ग्रांट मिली है। यह ग्रांट उन्हें 5 साल के लिए दी गई है, जिसके तहत वे यह अध्ययन करेंगी कि यदि ओरल कैंसर की पहचान दंत बीमा का हिस्सा हो, तो इस बीमारी पर कितना नियंत्रण पाया जा सकता है। 

पॉलिसी बनाने में रिसर्च होगी मददगार  

डॉ. आस्था बताती हैं, "अमेरिका में दंत बीमा (डेंटल इंश्योरेंस) का प्रावधान है, बिल्कुल चिकित्सा बीमा (मेडिकल इंश्योरेंस) की तरह। इसके तहत हर राज्य के अपने अलग नियम होते हैं। कुछ राज्यों में अच्छे बीमा कवर दिए जाते हैं, जिसमें कैंसर पहचान भी शामिल होती है, जबकि कुछ राज्यों में केवल फिलिंग या बुनियादी उपचार के लिए ही दंत बीमा (डेंटल इंश्योरेंस) मिलता है। ऐसे में हमारी शोध यह बताएगी कि यदि दंत चेकअप का खर्च बीमा के माध्यम से सरकार उठाए, तो इससे कैंसर की रोकथाम में कितना लाभ होगा। इस शोध से नीति निर्माण में सहायता मिलेगी।"

छोटा छाला भी हो सकता है प्री-कैंसर स्टेज का लक्षण

डॉ. आस्था बताती हैं, "ओरल कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह शुरुआती चरण में बिल्कुल पहचान में नहीं आता। केवल डॉक्टर ही ओरल परीक्षण के दौरान इसके लक्षण पहचान सकते हैं। कई बार एक छोटा सा छाला, जो लंबे समय से ठीक नहीं हो रहा, या गाल में भीतर की ओर सफेद धब्बा और तंबाकू के लंबे समय से सेवन के कारण मुंह का पूरा न खुलना भी कैंसर के शुरुआती चरण का संकेत हो सकता है। यह लक्षण हमें तब तक नहीं पता चलते, जब तक कि यह गंभीर रूप नहीं ले लेता और फिर हमें महंगे और जटिल उपचार से गुजरना पड़ता है। जबकि यदि हम पहले से सतर्क रहें, तो छोटे उपचार से समस्या का हल निकाला जा सकता है। यदि आप साल में एक बार नियमित चिकित्सकीय चेकअप की तरह ही दंत चेकअप और सफाई के लिए डॉक्टर के पास जाएं, तो कैंसर को रोका जा सकता है।" 

सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क

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