8वीं पास चिंतामणि ने आलू से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

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8वीं पास चिंतामणि ने आलू से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

 मध्य प्रदेश के देवास जिले के दत्तोतर गांव की रहने वाली Chintamani Patidar की सफलता की कहानी आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। कभी मजदूरी कर परिवार का गुजारा करने वाली चिंतामणि आज करोड़ों के टर्नओवर वाली कंपनी की चेयरमैन डायरेक्टर बन चुकी हैं।

महज आठवीं तक पढ़ी चिंतामणि ने करीब 10 हजार रुपये से आलू चिप्स का छोटा कारोबार शुरू किया था, जो आज 5.05 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उनकी कंपनी का ब्रांड ‘दीदी चिप्स’ अब मध्य प्रदेश के साथ-साथ कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र तक अपनी पहचान बना चुका है।

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स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी

जुलाई 2017 में चिंतामणि कृष्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। यहीं से उनके जीवन में नया मोड़ आया और उन्होंने मजदूरी छोड़कर व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद वर्ष 2021 में भारत सरकार की किसान उत्पादक कंपनी योजना के तहत विजयागंज मंडी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया। इस कंपनी में चिंतामणि पहले डायरेक्टर बनीं और बाद में चेयरमैन डायरेक्टर के रूप में इसकी कमान संभाली।

किसानों के आलू से बना सफल ब्रांड

देवास जिले के दत्तोतर क्षेत्र में आलू की अच्छी पैदावार होती है। पहले किसान अपना आलू मात्र 10 रुपये प्रति किलो में बेचते थे। अधिकारियों की सलाह पर चिंतामणि ने सोचा कि यदि इन्हीं आलुओं से चिप्स बनाकर बेचे जाएं तो किसानों और महिलाओं दोनों की आय बढ़ सकती है। इसके बाद एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज संस्था के सहयोग से आलू चिप्स उत्पादन यूनिट स्थापित की गई और ‘दीदी चिप्स’ ब्रांड की शुरुआत हुई।

इसलिए रखा गया ‘दीदी चिप्स’ नाम

चिंतामणि के अनुसार, इस ब्रांड के पीछे मेहनत करने वाली सभी महिलाएं थीं, इसलिए इसका नाम ‘दीदी चिप्स’ रखा गया। आज इस यूनिट में 20 से 25 महिलाओं को सीधा रोजगार मिला है। करीब 100 महिलाओं को उन्नत आलू बीज उपलब्ध कराए गए। 125 किसानों की मिट्टी का निःशुल्क परीक्षण कराया गया। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ी और स्थानीय किसानों को भी बेहतर बाजार मिला।

सरकार से मिली इक्विटी सहायता

दीदी चिप्स का कारोबार तेजी से बढ़ा है। आज कंपनी से 608 से अधिक शेयरधारक जुड़े हुए हैं। भारत सरकार से कंपनी को 11.72 लाख रुपये की इक्विटी सहायता भी मिली है। कभी मजदूर रही चिंतामणि अब न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि सैकड़ों महिलाओं को रोजगार देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं।

संघर्षों से भरा रहा सफलता का सफर

चिंतामणि बताती हैं कि उनका गांव शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर है। पहले उन्हें रोजाना 6 किलोमीटर पैदल चलकर आना-जाना पड़ता था। कम शिक्षा, सामाजिक झिझक और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार के समर्थन और मेहनत के दम पर आज वह सफलता की मिसाल बन चुकी हैं। उनके कार्यों के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। 

संदर्भ स्रोत एवं छाया : ईटीवी भारत 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क 

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