आर्थिक तंगी ने रोका दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ी

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आर्थिक तंगी ने रोका दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ी
सुदामा की उच्च शिक्षा का रास्ता

छाया: आंचलिक खबर डॉट कॉम 

• आर्थिक तंगी बनी परेशानी, करना चाहती है यूपीएससी की तैयारी

• एक दिन की कलेक्टर रही सुदामा ने प्रदेश के लिए कई मेडल जीते

भोपाल राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने वाली दृष्टिबाधित सुदामा चक्रवर्ती के हौसले को सभी सलाम करते हैं, लेकिन आर्थिक संकट के चलते उच्च शिक्षा के लिए लाचार खुद सुदामा के हौसले अब पस्त होने लगे हैं। एक दिन की सांकेतिक कलेक्टर बनकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी सुदामा का परिवार आर्थिक संकट के चलते अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने में असमर्थ है

कटनी के ढीमरखेड़ा की जूडो खिलाड़ी सुदामा चक्रवर्ती के पिता छोटे लाल चक्रवर्ती मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। तीन भाई और दो बहनों में सबसे छोटी सुदामा की शुरुआती पढ़ाई में दिव्यांगता आड़े आई लेकिन उन्होंने शिक्षित होने का अपना सपना नहीं छोड़ा और बीए का सफर जैसे-तैसे पूरा कर लिया,  लेकिन अब पैसों के अभाव में उसकी आगे कि पढ़ाई छूट सकती है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कटनी कलेक्टर बनी थीं सुदामा

छाया: नवभारत टाइम्स 

 

सुदामा कहती हैं उनकी तमन्ना तो यूपीएससी की तैयारी के साथ जूडो में अपना कॅरिअर बनाना और इंटरनेशनल पैरा ओलिंपिक में खेलकर देश और प्रदेश का मान बढ़ाना है, लेकिन सुविधाओं का अभाव और आर्थिक चुनौती बड़ी समस्या बन गई है। बता दें सुदामा चक्रवर्ती को साल 2022 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक दिन के लिए कटनी का कलेक्टर बनाया गया था। साथ ही जर्मनी के डायरेक्टर सुदामा के जीवन पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी बना चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सुदामा आज माली दौर से गुजर रही है।

उपलब्धियां

 साल 2015 में गोवा में आयोजित टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल 

 2016 में सुदामा ने लखनऊ में ब्रांज मेडल

 2017 में ने गुड़गांव में गोल्ड मेडल

2018 में दोबारा गुड़गांव में ब्रांज मेडल

2019 में दिल्ली में सिल्वर मेडल

2021 में लखनऊ में सिल्वर मेडल

पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन मप्र के सीईओ डॉ. वीके डबास कहते हैं ब्लाइंड जूडो की फेडरेशन अलग है, जो लखनऊ से संचालित होती है। मैं सुदामा के आर्थिक हालातों से वाकिफ नहीं हूं, लेकिन जो मदद हो सकेगी, मैं करवाऊंगा।

संदर्भ स्रोत: पत्रिका

संपादन: मीडियाटिक डेस्क

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