कचरा प्रबंधन में बदलाव की मिसाल बनी ‘सकारात्मक सोच'

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कचरा प्रबंधन में बदलाव की मिसाल बनी ‘सकारात्मक सोच'

छाया : सकारात्मक सोच संस्था-फेसबुक अकाउंट 

भोपाल के कल्पना नगर की 'सकारात्मक सोच' नामक स्वयंसेवी संस्था, जो पिछले दस वर्षों से शहर को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए कार्यरत है, अब एक नई मिसाल प्रस्तुत कर रही है। यह टीम सिर्फ सफाई ही नहीं करती, बल्कि शहरवासियों की सोच को भी बदल रही है। संस्था का यह कार्य पूरे शहर में प्रेरणा का स्रोत बन चुका है और इसके योगदान को देखते हुए नगर निगम ने भी इसे अपना स्वच्छता साथी और ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। 

संस्था की शुरुआत 2015 में 20-25 महिलाओं के एक छोटे समूह द्वारा हुई थी। अब यह संस्था 200 महिलाओं की एक मजबूत टीम बन चुकी है, जो शहरभर में स्वच्छता अभियान चला रही है। इन महिलाओं ने मिलकर न केवल पार्कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई की है, बल्कि कचरा प्रबंधन के लिए नए उपायों की भी शुरुआत की है। 

कचरा प्रबंधन और पुनर्नवीनीकरण की अनोखी पहल 

संस्था की सदस्य महिलाएं बिल्डरों और व्यापारियों से पुराने पेंट और ऑयल डिब्बे लेकर उन्हें रंगकर डस्टबिन में बदलती हैं। इन डस्टबिनों का वितरण शहर के विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। पिछले पांच सालों में उन्होंने 20,000 से अधिक डस्टबिन बांटे हैं। फिलहाल 10,000 और डस्टबिन बनाने की प्रक्रिया जारी है, जिन्हें शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर रखा जाएगा। 

कपड़े के थैले, बर्तन बैंक और व्हीलचेयर बैंक 

"सकारात्मक सोच" संस्था ने प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए पुराने कपड़ों से थैले बनाए और इन्हें मुफ्त में वितरित किया। इसके साथ ही, बर्तन बैंक और व्हीलचेयर बैंक जैसी पहलें भी शुरू की गईं, जो जरूरतमंदों को मुफ्त सेवाएं प्रदान करती हैं। इसके अलावा, संस्था ने भोपाल के 17 पार्कों का सौंदर्यकरण भी किया है, जहां अब नियमित रूप से सामूहिक श्रमदान होते हैं। 

प्रधानमंत्री  की सराहना से संस्था को मिली नई ऊर्जा 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 'मन की बात' कार्यक्रम में इस संस्था की सराहना कर चुके हैं। इस उत्साहवर्धन से संस्था को और अधिक कार्य करने के लिए प्रेरणा मिली है और अब वे और अधिक पहल करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संस्था के पदाधिकारी अब शहरवासियों से अपील कर रहे हैं कि वे खाली पेंट और ऑयल के डिब्बे संस्था को दें, ताकि इनका पुनर्नवीनीकरण कर स्वच्छता में योगदान किया जा सके। इसके साथ ही, उन्होंने प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े के थैले के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। 
 

सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर 

संपादन : मीडियाटिक डेस्क

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