छेड़छाड़ की घटना से बदली जिंदगी, अब

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छेड़छाड़ की घटना से बदली जिंदगी, अब
छात्राओं को आत्मरक्षा सिखा रही हैं अन्या

इंदौर की रहने वाली अन्या सांघवी ने बहुत कम उम्र में वह कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े लोग भी सोचते रह जाते हैं। जिस उम्र में ज्यादातर छात्र बोर्ड परीक्षा और करियर की चिंता में रहते हैं, उसी उम्र में अन्या ने समाज के लिए कुछ करने की ठान ली। 12वीं कक्षा की एक छात्रा आज सिर्फ अपनी पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हजारों छात्राओं के लिए हिम्मत, आत्मविश्वास और सुरक्षा की मिसाल बन चुकी है।पिछले एक साल से वह स्कूल-स्कूल जाकर छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे रही हैं। अब तक अन्या इंदौर के आठ से ज्यादा स्कूलों में हजारों छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखा चुकी हैं।

 घटना जिसने आत्मरक्षा सीखने का जज्बा पैदा किया

यह सफर किसी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसी घटना से शुरू हुआ जिसने अन्या को अंदर तक झकझोर दिया। अन्या रोज की तरह स्कूल जा रही थीं, तभी उन्होंने देखा कि सड़क पर कुछ मनचले एक लड़की को परेशान कर रहे थे। वह लड़की खुद को असहाय महसूस कर रही थी। उस पल अन्या को लगा कि अगर उस लड़की को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग होती, तो हालात शायद अलग होते। यहीं से अन्या ने तय कर लिया कि वह खुद भी आत्मरक्षा सीखेंगी और दूसरों को भी सिखाएंगी।

खुद सीखा, फिर दूसरों को सिखाने का लिया फैसला

अन्या ने एक कोचिंग संस्थान से विधिवत सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के दौरान उनके मन में एक और विचार आया “मेरी तरह ऐसी कितनी ही लड़कियां हैं, जो रोज ऐसे हालात से गुजरती हैं, तो क्यों न सिर्फ खुद सीखकर रुकने के बजाय दूसरों को भी सिखाया जाए।” यही सोच उनके मिशन की नींव बनी।  

पढ़ाई के साथ मिशन जारी, मां की शर्त को भी निभाया

अन्या ने अपने इस विचार को परिवार के साथ साझा किया। उनकी मां प्रिया सांघवी ने बेटी के जज्बे की सराहना की, लेकिन एक शर्त रखी कि पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत अंक लाने वाली अन्या से 12वीं में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। अन्या ने इस चुनौती को स्वीकार किया और दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।  

स्कूलों में तय शेड्यूल, रात तक पढ़ाई 

मां प्रिया बताती हैं कि अब अन्या को स्कूलों से बाकायदा ट्रेनिंग शेड्यूल मिलने लगे हैं।  अन्या अपनी कक्षाएं पूरी करने के बाद तय समय पर दूसरे स्कूलों में जाकर छात्राओं को आत्मरक्षा सिखाती हैं।  घर लौटकर वह खुद को तरोताजा करती हैं और फिर देर रात तक पढ़ाई करती हैं, ताकि शिक्षा में कोई कमी न रह जाए। फिलहाल प्री-बोर्ड परीक्षाओं के चलते उन्होंने ट्रेनिंग को सीमित किया है, लेकिन मिशन पूरी तरह जारी है।

इंदौर से बाहर तक फैल रही पहचान 

अन्या की पहल अब सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रही। प्रदेश के दूसरे जिलों और यहां तक कि अन्य राज्यों के स्कूलों से भी फोन आने लगे हैं। फिलहाल करीब 17 स्कूलों का शेड्यूल पाइपलाइन में है। परिवार ने तय किया है कि बोर्ड परीक्षाएं खत्म होने के बाद इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। 

आत्मरक्षा सिर्फ ताकत नहीं, आत्मविश्वास भी देती है

अन्या मानती हैं कि सेल्फ डिफेंस सिर्फ शारीरिक सुरक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास भी देता है। उनका उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लड़कियों को यह एहसास कराना है कि वे कमजोर नहीं हैं।

सन्दर्भ स्रोत : डीबी स्टार

संपादन : मीडियाटिक डेस्क 

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