छाया: दैनिक भास्कर
• बच्चों, महिलाओं को सिखा रहीं राखी, शिवलिंग, गणेश प्रतिमा, कबाड़ से खिलौने बनाना
भोपाल। तुलसी नगर में रहने वाली सलीमुन निशा उर्फ गुड़िया खान भले ही घर के हालातों के कारण उच्च शिक्षा नहीं ले पाईं, लेकिन अपने अंदर छिपी प्रतिभा को उन्होंने न सिर्फ निखारा, बल्कि अपनी आय का जरिया भी बनाया। इतना ही नहीं, अपनी ही जैसी दूसरी महिलाओं को आर्ट एंड क्राफ्ट की ट्रेनिंग देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना दिया है।
40 वर्षीय गुड़िया खान आर्थिक तंगी के चलते 10वी के बाद नहीं पढ़ पाई, लेकिन उन्होंने खुद को नहीं रोका। अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए उन्होंने क्राफ्ट, कबाड़ से जुगाड़ और खिलौने बनाना शुरू किया। खास बात यह कि उन्होंने इसका कोई प्रशिक्षण नहीं लिया, बल्कि खुद ही घर में इस हुनर को निखारा है। अब वे खुद तो पैसे कमा ही रही हैं, साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। वे राखी, शिवलिंग, गणेश प्रतिमा, कबाड़ से जुगाड़ कर खिलौने बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इसके अलावा सलीमुन अपने हुनर के जरिए गरीब बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट सिखाकर, उन्हें हुनरमंद बना रही हैं।
त्योहारों के सीजन में न्यूज पेपर से कई तरह के डेकोरेटिव आइटम भी बनाना सिखाती हैं। सहारा साक्षरता संस्था से जुड़ने के बाद लर्निंग सेंटर की शिक्षिका सलीमुन अभी तक लगभग 8 बस्तियों में 200 से अधिक बच्चों और महिलाओं को राखी के साथ कबाड़ से खिलौने, झूमर, क्राफ्ट के गुलदस्ते बनाना सीखा चुकी हैं। बनाई गई वस्तुओं की मार्केटिंग कर रोजगार भी कर रही हैं।
कई जगह से मिलने लगे हैं ऑर्डर
सलीमुन बताती हैं कि चावल, ऊन, रेशम के धागों से राखियां बनाकर बाकायदा उसकी मार्केटिंग की जा रही है, जिससे आज कई जगह से ऑर्डर भी आना शुरू हो गए हैं। जितना खर्च होता है, उसे निकालने के बाद कुछ आमदनी हो जाती है। सहारा साक्षरता संस्था से जुड़ने के बाद बस्ती के कई बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट का निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
संदर्भ स्रोत: दैनिक भास्कर



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