एनसीईआरटी की 10वीं इतिहास की बुक के दो

blog-img

एनसीईआरटी की 10वीं इतिहास की बुक के दो
चैप्टर पर मृणालिनी ने लिखे टीचिंग मॉड्यूल

छाया: मृणालिनी पांडे के फेसबुक अकाउंट से 

 

• बच्चों में रुचि जगाएं, वे आगे खुद गूगल कर लेंगे

भोपाल। इतिहास आमतौर पर लोगों के लिए बहुत ही बोरिंग और नीरस विषय होता है। यही वजह है कि अक्सर बच्चे इस विषय में कम ही रुचि रखते हैं लेकिन भोपाल की मृणालिनी पांडे ने हाल ही में इतिहास के ग्लोबलाइजेशन और यूरोपियन रिवॉल्यूशन विषय (1) यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय 2) भूमण्डलीकृत विश्व का बनना) टीचिंग मॉड्यूल लिखे हैं जिन्हें एनसीईआरटी की कक्षा नवमी व दसवी इतिहास की किताब में प्रकाशित किया गया है। जिसमें बताया गया है कि इतिहास जैसे विषय को बच्चो के लिए किस तरह से रुचिकर बनाया जा सकता है।

मृणालिनी कहती हैं अगर इतिहास को पढ़ाने का तरीका मजेदार बनाया जाए, तो इतिहास बच्चों का पसंदीदा विषय बन सकता है। आज बच्चों के पास इंटरनेट की सुविधा है, इतिहास में रुचि होने पर वे खुद गूगल कर सम्बन्धित विषय ढूंढ लेंगे। टीचर की भी जिम्मेदारी है कि वे जो विषय पढ़ा रहे हैं, किसी तरह  उसके बारे में बच्चों में रुचि बढ़ा दें। मैं भी अक्सर जब भी इतिहास से जुड़ा कोई विषय पढ़ाती हूं, तो ऐसा ही करती हूं। जैसे- मैंने जब फ्रेंच रिवॉल्यूशन पढ़ाया, तो बच्चों को बताया कि फ्रांस में जो परिवार शासन कर रहा था, उनमें से ही एक परिवार जिस पर मर्डर का आरोप था,  भागकर इंडिया आ गया। इसका जिक्र अकबर की किताब 'आइने अकबरी' में मिलता है और उसी फ्रेंच फैमिली के साथ आए लोग भोपाल की बेगम की शरण में आ गए। उच्च शिक्षित होने के कारण उन्हें बेगम के दरबार में महत्वपूर्ण पद भी मिले। जहांगीराबाद में रह रही बॉरबन फैमिली को तो आप सब जानते हैं। जहांगीराबाद का नाम सुनते ही बच्चे खुद इससे जुड़ाव महसूस कर पाए, जबकि इससे पहले जब उन्हें सिर्फ फ्रांस के बारे में बताया जा रहा था, तो उनके लिए यह एक ऐसा देश था, जो बहुत दूर है और वे उसके बारे में कुछ नहीं जानते थे।

फिल्म-वेबसीरीज को बनाएं रिफ्रेंस  

इसी तरह इतिहास से जुड़े अन्य विषयों पर बात करते हुए बच्चों को उससे जुड़ी फिल्मों या वेबसीरीज का उदाहरण दिया जा सकता है। उनके साथ म्यूजियम जाकर, तो कभी मुगल इतिहास की कक्षा में  किसी सिक्के (क्वाइन) इकट्ठे करने वाले विशेषज्ञ को बुला सकते हैं, जो उन्हें सिक्के दिखा सके और उस बारे में जानकारी भी दे सके।

संदर्भ स्रोत: दैनिक भास्कर 

संपादन: मीडियाटिक डेस्क 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



गरीबी से सफलता तक: मध्यप्रदेश की
न्यूज़

गरीबी से सफलता तक: मध्यप्रदेश की , भगवती देवी बनीं ट्रैक्टर उद्यमी

हरदोली गांव की महिला ने दिखाया संघर्ष और आत्मनिर्भरता का रास्ता

महिलाओं की संस्था 'सकारात्मक सोच'
न्यूज़

महिलाओं की संस्था 'सकारात्मक सोच' , ने बदली स्कूल और आंगनवाड़ी की तस्वीर

शिक्षा और पर्यावरण में योगदान- स्कूलों में अब वाटर कूलर, पंखे, एलईडी के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी

नो केमिकल हर्बल प्रोडक्ट से बीमारियों से
न्यूज़

नो केमिकल हर्बल प्रोडक्ट से बीमारियों से , सुरक्षा उज्जैन की छात्राओं का अनोखा नवाचार

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की छात्राओं ने बनाया हर्बल प्रोडक्ट, डेली यूज की चीजें, खाने पीने के सामान क...

मां यशोदा बनकर सैकड़ों कुपोषित बच्चों
न्यूज़

मां यशोदा बनकर सैकड़ों कुपोषित बच्चों , को नई जिंदगी  दे रही रीवा की ममता

सामाजिक सेवा से मिलती है संतुष्टि - आठ साल पहले पहली बार 47 अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था।