छाया: पत्रिका
रतलाम।बचपन से ही कथक के प्रति लगाव के चलते रतलाम की दिपांका ने तीन वर्ष की उम्र से ही कथक सीखना शुरू कर दिया था। कथक को लेकर ऐसा जुनून कि उसे ही करियर बना लिया। स्नातक के बाद कला एवं समाजसेवा के क्षेत्र में समर्पित रहते हुए कथक में विशेष दक्षता हासिल करते हुए विशिष्ट पहचान बनाई। 29 वर्ष की आयु में कई उपलब्धियां हासिल की। विशिष्ट प्रतिभा की धनी दिपांका दिव्यांग बच्चों को भी कथक नृत्य की शिक्षा देती हैं।
दिपांका ने शुरुआत में 3 साल कथक रतलाम में सीखा। रोज 6 घंटे अभ्यास किया। 12वीं के बाद पढ़ाई के लिए इंदौर गईं, वहां कथक के गुरु नहीं मिलने से संघर्ष करना पड़ा, पर लक्ष्य पाने की जिद थी। बाद में कथक में एमए किया। आसपास के लोग टोकते थे कि यह कौनसा करियर है ।करियर बनाना है तो डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी में से किसी क्षेत्र में जाओ, लेकिन दिपांका ने ठान लिया था कि नृत्य में ही मुकाम बनाऊंगी। 2012 में कथक में डिप्लोमा प्रथम श्रेणी में प्राप्त किया। संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर से कथक में एमए किया। इस बीच देश-विदेश में प्रतिभा का लोहा मनवाया। अब रतलाम की दिपांका शर्मा जरूरतमंद बच्चों को कथक सीखा रही हैं।
मिल चुके हैं कई पुरस्कार
दिपांका इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ डांस एवं म्यूजिक बैकांक, थाईलैंड में इंडिया फेस्टिवल में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। 2021 में महानदी उत्सव ऑल इंडिया ऑनलाइन नृत्य स्पर्धा कथक ओडिशा की स्पर्धा में नेशनल नृत्य कोहिनूर अवार्ड मिला। नाद महोत्सव इंदौर में लगातार छह साल अवार्ड प्राप्त कर चुकी हैं। महाकालेश्वर संस्कृति महोत्सव में प्रस्तुति दे चुकी हैं। नृत्याजंलि सेंटर ऑफ ग्लोबल आर्ट एंड कल्चर नई दिल्ली का उत्कृष्ट प्रमाणपत्र प्राप्त किया।
संदर्भ स्रोत: पत्रिका



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