छाया: दैनिक भास्कर
• भविष्य में आने वाले खतरे से बचाना है मकसद
• पद्मश्री सम्मानित डॉ. लीला जोशी की पहल
रतलाम। मालवा की मदर टेरेसा कहलाने वाली पद्मश्री सम्मानित डॉ. लीला जोशी की पहल पर सरकारी अस्पताल में आने वाली बेटियों से मासिक धर्म से लेकर गर्भधारण जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जा रही है। मकसद इन बेटियों का आने वाला जीवन किसी भी तरह के खतरे से बचाना है।मध्य प्रदेश में पहली बार रतलाम के मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई (एमसीएच) में शुरू हुए काउंसलिंग सेंटर अस्पताल आने वाली बेटियों, नवविवाहिता के सवालों के जवाब दे रहा है। अब यह प्रोजेक्ट एक और कदम आगे बढ़ रहा है, जिसमें स्कूलों और कॉलेज तक युवतियों से चर्चा की जा सके।
बता दें कि डॉ. जोशी रतलाम जिले की जनजाति तथा ग्रामीण एवं शहरी मलिन बस्तियों में एनीमिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को कम करने में दो दशकों से भी अधिक समय से काम कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि रतलाम के एमसीएच में दो महीने पहले विवाह पूर्व एवं गर्भधारण पूर्व परामर्श केंद्र शुरू किया गया। दो महीने में यहां 100 से ज्यादा महिलाओं और युवतियों की काउंसलिंग की गई है। काउंसलिंग में मुख्य तौर पर ऐसे सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं, जो कि किसी से खुलकर नहीं पूछे जाते। इस काम में चुनौतियां भी हैं क्योंकि एमसीएच में ज्यादातर गर्भवती महिलाएं ही पहुंच रही हैं, युवतियों तक पहुंच बनाने के लिए अब यह प्रोजेक्ट एक कदम आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसमें स्कूल कॉलेजों की युवतियों को जोड़ा जाएगा ताकि उनके सवाल मन में न रह सकें ।
अभी चुनौतियां भी कम नहीं
• गर्भवतियों तक पहुंच हो रही, पर शादी योग्य युवतियां पहुंच से दूर
• काउंसलिंग के लिए आने में भी झिझक रहीं युवतियां
• इस विषय पर जागरूकता और शिक्षा ज्यादा जरूरत है। इसके लिए स्कूल-कॉलेजों को तक पहुँच बनानी होगी
• समस्याओं को दूर करने के लिए समिति बनी, जिसमें प्रतिष्ठित डॉक्टर शामिल
• पीपीटी और बुकलेट भी तैयार
• अब ब्लॉक स्तर पर भी सेंटर खोलने की तैयारी
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संदर्भ स्रोत: दैनिक भास्कर



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