डॉ. प्रिया भावे ने फिर जीती आयरनमैन चैंपियनशिप 

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डॉ. प्रिया भावे ने फिर जीती आयरनमैन चैंपियनशिप 

छाया : सचिन चित्तावर के फेसबुक अकाउंट से

भोपाल की डॉ. प्रिया भावे चित्तावर (Dr. Priya Bhave Chittawar) आयरनमैन चैंपियनशिप (Ironman Championship) प्रतियोगिता में भाग लेने कज़ाकिस्तान गई थीं। सब कुछ समय और नियम से हुआ। उन्होंने अपनी पात्रता भी प्राप्त कर ली और उन्हें मेडल भी मिल गया। लेकिन बाद में जब उन्होंने अपनी घड़ी देखी तो पता चला कि उनकी दौड़ में 3-4 किलोमीटर कम थे। पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि गलती उनकी नहीं थी, बल्कि रास्ते में लगे साइन बोर्ड के हटने के कारण उनका मार्ग बदल गया था। उन्हें पूरे सम्मान के साथ मेडल मिला लेकिन मन में एक फांस रह गई थी कि लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने यह कीर्तिमान गोवा में भी प्राप्त किया। लेकिन कज़ाकिस्तान की फांस मन से नही निकली। अब एक साल के बाद फिर कज़ाकिस्तान में ही यह कीर्तिमान डॉ. प्रिया ने सारे नियम-कायदों पर अमल करते हुए हासिल कर लिया है ।

उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने नवम्बर 2022 में गोवा में आयोजित दुनिया की सबसे बड़ी आयरनमैन चैंपियनशिप में भी भोपाल (Bhopal) का परचम लहराया था। चैंपियनशिप में 1600 से ज्यादा प्रतिभागी थे। 600 प्रतिभागी अन्य देशों से थे। आयरमैन प्रतियोगिता में एक प्रतिभागी को 1900 मीटर की तैराकी, 90 साइकिलिंग के साथ 21 किमी की दौड़ को पूरा करने का टास्क दिया जाता है। डॉ. प्रिया ने इन तीनों ही लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।ऐसा करने वाली वह मप्र की दूसरी और पेशेवर डॉक्टर के रूप में प्रदेश की पहली महिला बन चुकी हैं। इनसे पहले आर्मी से रिटायर्ड पूनम जोशी ने चार साल पहले आयरमैन को पूरा किया था। भोपाल से 12 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया था।

• संतानहीन दंपतियों का करती हैं इलाज

डा. प्रिया के दो बच्चे हैं, जिनमें एक 19 साल बेटा बेंगलूरु में पढ़ाई कर रहा है। जबकि दूसरा बेटा अभी स्कूल में है। डा. प्रिया रिप्रोडक्टिव मेडिसिन एक्सपर्ट हैं। वे संतानहीन दंपतियों का इलाज करती हैं। वे कहती हैं कि इस चैंपियनशिप के लिए मैंने उन दंपतियों को याद कर अपने अंदर हिम्मत जुटाई कि किस तरह वह संतान की कमी को महसूस करते हैं और सालों तक इस दर्द को महसूस करते हैं इसलिए मेरा भी मन इसके लिए मजूबत हुआ।

सबसे पहले तैरना सीखा

डॉ. प्रिया ने बताया कि वे सुबह चार बजे उठकर इस चैंपियनिशप की तैयारी करती थीं। स्मार्ट वॉच की मदद से दौड़ने की स्पीड, हार्ट का डेटा, साइकिल की स्पीड के हिसाब से वर्कआउट करती थीं। इस काम में उनके कोच फोन से मदद करते थे। डॉ. प्रिया ने खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें तैराकी तो आती ही नहीं थी और तो और, उन्हें पानी से भी डर लगता था। इसी साल जुलाई में उन्‍होंने तैराकी सीखी। इस चैंपियनिशप के लिए पिछले कुछ महीनों से वे एक बड़े तालाब में 900 मीटर की तैराकी का अभ्यास कर रही थीं, जिसके बाद पहली बार उन्होंने गोवा के समंदर में तैराकी की और 57 मिनट में टास्क पूरा किया।

स्कूल और कॉलेज में भी खेल से दूर रहीं 

डॉ. प्रिया बताती हैं कि डॉक्टरी पेशे में होने के कारण वे खेलकूद में कभी ज़्यादा भाग नहीं ले सकीं। स्कूल और कॉलेज में भी खेल से दूर रहीं। तीन साल पहले अभिनेता मिलिंद सोमन ने आयरनमैन चैंपियनशिप पूरी की थी, उन्हीं से उन्‍हें प्रेरणा मिली और वे इसकी तैयारी करने लगीं। उन्‍होंने तीनों काम जी जान लगाकर सीखे। वे भोपाल में 200 किमी साइकिलिंग करती थीं , इसके साथ ही वन विहार में दौड़ लगाती थी। पहाड़ियों पर भी उन्होंने इन चीज़ों का अभ्यास किया।

संदर्भ स्रोत : डॉ सचिन चित्तावर की फ़ेसबुक पोस्ट तथा दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार

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