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• भारत से शामिल 10 कलाकारों में मध्य प्रदेश से जापानी अकेली
भोपाल। आदिवासी कलाकार और उनकी कला से भोपाल हमेशा से समृद्ध रहा है। इसका काफी श्रेय जनगढ़ सिंह श्याम जैसे अन्तराष्ट्रीय कलाकारों को जाता है, जिन्होंने न सिर्फ अपने लिए कला के दरवाजे खोले, बल्कि अगली पीढ़ी को भी इससे जोड़ने के कई बड़े काम किए। जनगढ़ श्याम के उन्हीं शिष्यों में से एक है उनकी बेटी जापानी श्याम धुर्वे। जापानी इन दिनों साउथ कोरिया में आयोजित इंटरनेशनल आर्ट कैंप में भोपाल का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यह कैंप 14 सितंबर तक जारी रहेगा।
• आर्ट कैंप में टैगोर थीम पर पेंटिंग
जापानी बताती हैं “यह मेरा पहला इंटरनेशनल आर्ट कैंप हैं। इस कैंप का आयोजन यहां के नामी आईलैंड पर किया गया है। ऐसे में हमें नदियों की थीम पर चित्र बनाने को कहा गया है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नदियों पर कई पेंटिंग्स की हैं, इसीलिए मैं कैंप में टैगोर थीम पर पेंटिंग बना रही हूँ।”
• कंटेम्पररी फॉर्मेट में करती हैं गोंड प्रधान पेंटिंग्स
जापानी ने काफी कम उम्र में ही चित्रकारी करना शुरू कर दिया था। उनके पिता के कारण कला के प्रति जापानी का झुकाव हमेशा से रहा। वे जापानी को चित्र बनाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते थे। छोटी उम्र से ही जापानी आत्मविश्वास के साथ चित्र बनाने लगीं थीं। 11 वर्ष की उम्र में वर्ष 1999 में उन्हें कमला देवी अवॉर्ड मिल गया था। इसके बाद 2018 में फिक्की की तरफ से विमन अचीवर ऑफ इंडिया चुनी गई। 2022 में दिल्ली में राजारवि वर्मा अवॉर्ड मिला। जापानी अपने आस-पास जो भी चीजें देखती हैं, उन्हें गोंड प्रधान शैली से जोड़कर चित्र बनाती हैं।
सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर



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