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• टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर का असर
तीन कमरों के अपने नए फ्लैट की दीवारों को स्पर्श करते हुए भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम की गोलकीपर खुशबू खान रोमांचित होकर कहती है --"यह परी कथाओं के सच होने जैसा अहसास है।" जन्म से लेकर जवानी की दहलीज पर पहुँचने तक एक झुग्गी में रहती आई खुशबू को अब जाकर अपने सपनों का आशियाना मिला है जिसकी छत टीन-टप्पर की नहीं, ठोस कंक्रीट की है।
और यह मुमकिन हुआ मुंबई निवासी शिवा गुलवाड़ी की वजह से और इसके लिए खुशबू उनकी शुक्रगुजार है। दरअसल, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में मई, 2022 में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी कि किस मुश्किल हालात में भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाडी झुग्गी में रह रही है और किस तरह संघर्ष करते हुए वह भारतीय टीम में अपनी जगह बना पाई है। श्री गुलवाड़ी यह खबर पढ़कर से द्रवित हो गए और उहोने किसी तरह खुशबू से संपर्क कर उसे नया घर दिलाने का वादा किया। आखिरकार उनका वादा पूरा हुआ और 3 जुलाई खुशबू को 36 लाख रुपये के फ्लैट की चाबियाँ मिल गईं।
ख़ुशी से चहकती खुशबू ने कहा हम जल्द ही नए फ्लैट में रहने जा रहे है। इसकी अंदरूनी साज -सज्जा का काम पूरा हो चुका है। वह कहती है - "मै उस दिन को कभी नहीं भूल सकती जब टाइम्स ऑफ़ इंडिया में मेरी संघर्ष यात्रा की खबर छपी थी। उसने मेरी ज़िन्दगी बदल दी। किसी में कल्पना भी नहीं की थी कि रिपोर्ट के असर से मुझे नया घर मिलेगा। मैं और मेरा परिवार इस सहयोग के लिए हमेशा शिवा सर के शुक्रगुज़ार रहेंगे।"
हालाँकि शिवा गुलवाड़ी इस सहयोग को एहसान मानने से परहेज़ करते है। उनका कहना है, "मैंने कुछ नहीं किया। जो कुछ किया भगवान ने किया।"
पिछले सात वर्षों से खुशबू दुनिया भर के टूर्नामेंटों में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम की तरफ से खेल रही है। इन यात्राओं से लौटकर उसे अपनी झुग्गी में ही आना पड़ता था। हालाँकि टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के बाद अनेक सहृदय लोगों में खुशबू की मदद की पेशकश की।
मुंबई के रिटायर्ड इंजीनियर 64 वर्षीय शिवा उनमें से एक थे। उनका कहना है कि मैं नहीं चाहता था कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की प्रतिभा इस तरह व्यर्थ हो जाये। ख़बर पढ़कर मुझे खुशबु और उसके परिवार के दर्द का एहसाह हुआ। लगा कि किस तरह अनेक देशों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाडी कठिनाइयों में रह रही है। ईश्वर की कृपा से उसे नया घर मिल गया है। अब वह पूरी तरह से खेल पर अपना ध्यान केंद्रित कर पायेगी।" शिवा कहते हैं कि खुशबू की मदद करने के पीछे एक व्यक्तिगत वजह भी है। हालांकि वजह बताने से उन्होंने विनम्रतापूर्वक इंकार कर दिया। " बस इतना समझ लीजिये कि मैंने कभी अपने आप से वादा किया था कि अगर मै कभी किसी प्रतिभा की मदद करने की स्थिति में होऊँगा तो ज़रूर मदद करूँगा।"
खुशबू इन दिनों अगले विश्व कप के लिए जूनियर नेशनल टीम की तैयारी के लिए बैंगलोर में हैं। वह अपने फ्लैट की चाबियाँ लेने के लिए खास तौर से दो दिनों के लिए भोपाल आई थी। खुशबू 2017 से भारतीय महिला जूनियर नेशनल टीम में गोलकीपर है और टीम के साथ बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, चिली, साउथ अफ्रीका, बेलारूस, आयरलैंड और अन्य देशों की अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग ले चुकी है। पहले खुशबू सीनियर नेशनल कैंप में थी लेकिन फिर जूनियर कैंप में आ गई क्योंकि उम्र के लिहाज़ से उसे अभी जूनियर टीम में खेलने की पात्रता है।
खुशबू के पिता शब्बीर ख़ान ऑटो चालक हैं। परिवार में चार भाई बहिन हैं। शब्बीर कहते हैं, कि अपनी बेटी के अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी होने पर उन्हें गर्व और रोमांच महसूस होता है। हम उसे इसी तरह आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। हमें बहुत बुरा लगता था कि मेरी बेटी जो खेलने के लिए हवाई जहाज से विदेश जाती थी और बड़े होटलों में रूकती थीं, वापस घर आने पर उसे वही कठिनाइयों भरा जीवन जीना पड़ता था। अब अल्लाह की दुआ से हमारे पास भी रहने के लिए अच्छा घर मिल गया है। हम हमेशा शिवा सर के एहसानमंद रहेंगे।
साभार : टाइम्स ऑफ़ इंडिया



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