छाया : आयुषी डॉट इन्फो
• उत्तम क्षमा के सिद्धांत से जोड़कर न्यूयॉर्क पुलिस को दिखा रही न्याय की नई राह
इंदौर की बेटी आयुषी जैन ने न्यूयॉर्क पुलिस को उत्तम क्षमा के सिद्धांत से जोड़कर उन्हे न्याय की नई राह दिखाई है। आयुषी इन दिनों अमरीका के न्यूयॉर्क शहर की एक मल्टीनेशनल कंपनी में डिजाइनिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। उन्होंने क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में जैन सिद्धांतों को शामिल करने के लिए मुहिम शुरू की है। वे करीब चार वर्षों से अमेरिका में रह रही हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी नई सोच और समस्याओं के नवाचार युक्त समाधानों से अलग पहचान बनाई है। वह अमेरिका और कनाडा की सरकारों के साथ मिलकर वहां के कई प्रोजेक्ट के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने अमेरिका में दी जाने वाली विभिन्न तरह की सहायता राशि को हर वर्ग और हर रंग के एनजीओ और संगठनों में बराबर वितरित करने में भी वहां की सरकार की मदद की है।
इटली की कॉफ्रेंस में प्रजेंट करने वाली हैं
आयुषी ब्राजील में ऑनलाइन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस, फीनलैंड के एक विश्वविद्यालय में प्रजेंटेशन दे चुकी हैं। वहीं, डिजाइन रिसर्च प्लेटफॉर्म पर उनका पेपर भी प्रकाशित हो चुका है। अब वे अमेरिका की सोसायटी फॉर द सोशल स्टडीज ऑफ साइंस और इटली की एक कॉफ्रेंस में वे ‘न्याय में क्षमा भाव को शामिल किया जाए, तो उसका स्वरूप कैसा होगा’ विषय पर प्रजेंटेशन देंगी।
यह एक विचार; जिसका द. अफ्रीका में हुआ प्रयोग
आयुषी कहती हैं अपराध करने पर अभी हर जगह न्याय व्यवस्था है, यानी अपराधी को अपराध के हिसाब से कम या सख्त सजा दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे अपराध के व्यवहार में बदलाव आएगा। अभी जो न्याय व्यवस्था है, वह कहीं न कहीं प्रतिशोध के सिंद्धात पर आधारित है। यदि जैन धर्म के सिंद्धातों को अपनाया जाए तो क्षमा के जरिए समाज की हिंसा को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बकौल आयुषी क्षमा का यह मॉडल अभी एक विचार है जिस पर काम किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका में सालों पहले ऐसा हो चुका है, जब वहां की आधी आबादी अमानवीय रंगभेद की गुनहगार थी। तब नेल्सन मंडेला ने यह सुझाव दिया कि पीड़ित पक्ष आरोपियों को प्रायश्चित का मौका दे। उन्हें दंडित करने के बजाय माफ करें। इससे देश आगे बढ़ सकेगा।
संदर्भ स्रोत : पत्रिका और दैनिक भास्कर
संपादन: मीडियाटिक डेस्क



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