भोपाल: मध्य प्रदेश का नवजात लिंगानुपात 919 है, जो राष्ट्रीय औसत 918 से 1 अंक अधिक है। हालांकि केरल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की तुलना में प्रदेश अभी भी काफी पीछे है। वहीं शहरी क्षेत्रों में बेटियों के जन्म में लगातार आ रही गिरावट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीण अंचल सुधरे, शहरों में आई गिरावट
एसआरएस रिपोर्ट 2024 के अनुसार 2018-20 में मध्य प्रदेश का नवजात लिंगानुपात 919 था, जो 2020-22 में घटकर 915 हो गया। हालांकि 2022-24 में यह फिर बढ़कर 919 पर पहुंच गया। इस सुधार में ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जहां 2018-20 में 908 से बढ़कर 2022-24 में 912 बेटियां प्रति 1000 बेटों पर जन्म लेने लगीं।
मध्य प्रदेश का नवजात लिंगानुपात
औसतन: 919
-
शहरी: 946
-
ग्रामीण: 912
राष्ट्रीय औसत से आगे, लेकिन शीर्ष राज्यों से पीछे
भारत का नवजात लिंगानुपात 2018-20 में 907 था, जो 2022-24 में बढ़कर 918 हो गया। मध्य प्रदेश का आंकड़ा 919 होने से यह राष्ट्रीय औसत से केवल 1 अंक आगे है। वहीं छत्तीसगढ़ (978) और केरल (974) देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश (956), आंध्र प्रदेश (946), असम (946) और तमिलनाडु (936) भी बेहतर स्थिति में हैं।
मध्य प्रदेश से बेहतर लिंगानुपात वाले राज्य
|
राज्य |
नवजात लिंगानुपात |
|
छत्तीसगढ़ |
978 |
|
केरल |
974 |
|
हिमाचल प्रदेश |
956 |
|
आंध्र प्रदेश |
946 |
|
असम |
946 |
|
तमिलनाडु |
936 |
अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में शहरी लिंगानुपात (946), ग्रामीण लिंगानुपात (912) से बेहतर है। यह गुजरात (901), हरियाणा (891) और दिल्ली (874) जैसे राज्यों से बेहतर प्रदर्शन करता है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ (990) और झारखंड (931) की तुलना में प्रदेश का प्रदर्शन अभी भी कमजोर है।
मध्य प्रदेश से पिछड़े राज्य
|
राज्य |
नवजात लिंगानुपात |
|
उत्तराखंड |
872 |
|
दिल्ली |
876 |
|
हरियाणा |
885 |
|
बिहार |
896 |
|
उत्तर प्रदेश |
916 |
शहरी क्षेत्रों पर विशेष फोकस जरूरी
सामाजिक कार्यकर्ता रीता सिंह के अनुसार राष्ट्रीय औसत से आगे होने के बावजूद मध्य प्रदेश अभी लैंगिक समानता के लक्ष्य से दूर है। विशेष रूप से शहरी समाज में बेटियों के जन्म को लेकर मौजूद मानसिकता में बदलाव लाने की आवश्यकता है।
वहीं भोपाल स्थित कैलाश नाथ काटजू चिकित्सालय की नोडल ऑफिसर डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं और उनके परिवारों को लगातार जागरूक किया जा रहा है तथा गर्भावस्था से पहले और बाद में काउंसलिंग की जा रही है, जिससे भविष्य में और बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
संदर्भ स्रोत: ईटीवी



Comments
Leave A reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *