अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत 'मुबारात' (आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद) को वैध मानते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट को ऐसे मामलों में विवाह समाप्त होने की औपचारिक घोषणा (डिक्लेरेशन) करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने अहमदाबाद फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि उसमें कोई कारण-ए-दावा (Cause of Action) नहीं बनता।
क्या है मामला?
रिकॉर्ड के अनुसार, पति-पत्नी का निकाह फरवरी 2015 में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। समय के साथ दोनों के बीच मतभेद बढ़ने पर उन्होंने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का फैसला किया।
दोनों पक्षों ने पहले आपसी समझौता किया और जुलाई 2024 में नोटरी के समक्ष तलाकनामा निष्पादित किया। पत्नी ने तलाक स्वीकार करते हुए भरण-पोषण संबंधी अपने अधिकारों का त्याग किया। समझौते के तहत उसे स्थायी गुजारा भत्ता और बच्चे की भविष्य की शिक्षा के लिए 25 लाख रुपये भी दिए गए।
इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में विवाह समाप्त होने की औपचारिक घोषणा के लिए याचिका दायर की। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि पत्नी ने तलाक का विरोध नहीं किया है, इसलिए कोई विवाद या कारण-ए-दावा मौजूद नहीं है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के इस दृष्टिकोण को गलत ठहराया। अदालत ने कहा कि 'मुबारात' मुस्लिम कानून के तहत मान्यता प्राप्त विवाह-विच्छेद का एक वैध तरीका है, जो पति-पत्नी की आपसी सहमति पर आधारित होता है।
पीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 7 के तहत फैमिली कोर्ट को किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति घोषित करने का अधिकार प्राप्त है। इसलिए यदि पक्षकारों के बीच वैध समझौते के आधार पर विवाह समाप्त हुआ है, तो अदालत का दायित्व है कि वह उसे स्वीकार करते हुए आवश्यक घोषणा जारी करे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक स्थिति की घोषणा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि दूसरा पक्ष उस स्थिति का विरोध कर रहा हो।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट ने कानून की गलत व्याख्या करते हुए याचिका खारिज की थी। इसी आधार पर 21 दिसंबर 2024 के आदेश को रद्द कर अपील स्वीकार कर ली गई।
अदालत ने घोषित किया कि पक्षकारों का विवाह मुबारात समझौते की तिथि से ही विधिवत समाप्त माना जाएगा तथा रजिस्ट्री को आवश्यक डिक्री तैयार करने के निर्देश दिए।



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