छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : माता और पिता की देखभाल बेटे की जिम्मेदारी

blog-img

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : माता और पिता की देखभाल बेटे की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना उचित कारण पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए बाध्य करना वैवाहिक क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए तलाक की मंजूरी दे दी। साथ ही, हाईकोर्ट ने पति को आदेश दिया है कि वह पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में दो माह के भीतर 5 लाख रुपये का भुगतान करे।

हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत में हिंदू बेटे के लिए पत्नी के कहने पर शादी करने के बाद माता-पिता से अलग होना कोई सामान्य प्रथा या संस्कृति नहीं है। माता-पिता द्वारा पाले-पोसे और शिक्षित किए गए बेटे का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि उनके बूढ़े होने पर देखभाल और भरण-पोषण करे। शादी के बाद पत्नी से पति के परिवार का हिस्सा बनने की उम्मीद की जाती है।

बेमेतरा में रहने वाले युवक की शादी 10 जून 2017 को छुईखदान में रहने वाली युवती के साथ हुई थी।शादी के बाद पत्नी करीब ढाई महीने अपने ससुराल में रहने के बाद कोचिंग जॉइन करने बिलासपुर जाने पर जोर देने लगी। जबकि शादी से पहले दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति बनी थी कि वह गृहिणी के तौर पर ससुराल में रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाएगी। सितंबर 2017 में वह पति या ससुराल वालों को बताए बिना कोचिंग जॉइन करने बिलासपुर चली गई। काफी समझाने के बाद इस शर्त पर राजी हुई कि पति को रायपुर में उसके साथ अलग रहना होगा। व्यवहार में सुधार की उम्मीद के साथ पति इस पर सहमत हो गया और उसे वापस गांव ले गया। करीब 20-25 दिनों के बाद उसने रायपुर में एक कोचिंग क्लास जॉइन किया। पति रायपुर के एक अस्पताल में डॉक्टर के पद पर कार्यरत था। पति- पत्नी गांव से 13-14 किमी तक एक साथ आते-जाते थे।

मोबाइल पर बताया- आज साथ नहीं जाएगी

20 अगस्त 2018 को उसने पति को कॉल कर बताया कि वह आज रायपुर में ही रुक रही है। पति ने पूछा कि वह कहां और किसके साथ रहेगी? इसका उसने जवाब नहीं दिया और अपना मोबाइल बंद कर दिया। पति ने इसकी जानकारी अपनी सास को दी तो उसने धमकी दी कि उस पर कोई प्रतिबंध लगाया तो झूठे आपराधिक मामले में फंसाकर जेल भिजवा देगी। इस व्यवहार से तंग आकर पति और उसके परिजनों ने 11 सितंबर 2018 को थाने में शिकायत की। थाने में काउंसिलिंग के दौरान पत्नी नहीं पहुंची और पति और उसके परिजनों के खिलाफ रायपुर में शिकायत दर्ज करवा दी।

पत्नी के कहने पर रायपुर में रहा पर नहीं बदला व्यवहार

फैमिली कोर्ट में वैवाहिक संबंधों की बहाली के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। यहां पत्नी ने रायपुर में साथ रहने पर सहमति देते हुए समझौता किया। 22 अप्रैल 2019 से 5 मई 2019 तक दोनों एक कॉलोनी में किराये के मकान में रहे। पत्नी का व्यवहार इस दौरान पति के साथ ठीक नहीं था। 5 मई 2019 को वह मकान का दरवाजा बंद कर चली गई। पति का कॉल भी रिसीव नहीं किया। इसके बाद पति ने कोर्ट में तलाक की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया।

ससुराल में रहने को तैयार नहीं थी महिला

 इधर, महिला ने सभी आरोपों से इनकार किया। कोर्ट ने भी पति के आवेदन को निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है। फैसले में कहा है कि बगैर किसी उचित कारण के पति को अपने माता- पिता से अलग रहने के कहना उसके प्रति क्रूरता के समान है। स्पष्ट है कि वह ससुराल में रहने के लिए तैयार नहीं है। वर्ष 2019 से अलग रह रही है। उसने ससुराल लौटने का भी कोई प्रयास नहीं किया। हाई कोर्ट ने पति को महिला को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में दो माह के भीतर पांच लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं।

 सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट : अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने इसे समानता और संवैधानि...

दिल्ली हाईकोर्ट : आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे पर क्रूरता के आरोप लगाने की स्थिति को आपसी सहमति से तलाक नहीं माना ज...

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी , शादी, फिर भी महिला को मिलेगा भरण-पोषण

हाईकोर्ट ने विवादित दूसरी शादी मामले में महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख
अदालती फैसले

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख , गुजारा भत्ता के बाद भी केस लड़ना उत्पीड़न

कोर्ट ने बुजुर्ग दंपति को राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को खारिज कर दिया है।

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से
अदालती फैसले

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से , बड़ा झटका, महिला और बेटे को देना होगा भरण-पोषण

डीएनए टेस्ट से इन्कार करने वाले शिक्षक को हाई कोर्ट ने महिला और बच्चे को भरण-पोषण देने का आदेश दिया।

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता
अदालती फैसले

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता , बच्चे के अधिकार नहीं छीन सकता

हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के आपसी समझौते से बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार खत्म नहीं हो सकते। अदालत ने गुजारा भत्...